आवर्त सारणी – संपूर्ण जानकारी हिंदी में

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किसी समूह में ऐसे समान गुणों वाले अवयवों को अलग करके एक व्यवस्थित रूप में रखना वर्गीकरण कहलाता है। शुरुआत में जब तत्वों की संख्या कम थी, उस समय उनके वर्गीकरण की आवश्यकता नहीं हुई लेकिन बाद में तत्वों की संख्या बढ़ती गई तो उनका सरल एवं क्रमबद अध्ययन करने के लिए वर्गीकरण की आवश्यकता हुई।

आवर्त सारणी - संपूर्ण जानकारी हिंदी में
आवर्त सारणी

1. लेबोजियर            –         धातु /अधातु
2. डोबरनियर           –           त्रिक नियम
3. न्यूलैंड                –          अष्टक नियम
4. मेंडलीफ         –    आवर्त सारणी (परमाणु भार)
5. मौझले           –    आधुनिक आवर्त सारणी                                                            (परमाणु क्रमांक)

तत्वों का सर्वप्रथम वर्गीकरण डोबरनियर ने किया था। डोबरनियर ने सन् 1829 में समान गुण वाले तत्वों को तीन-तीन तत्वों के समूह में रखा है, जिन्हें त्रिक कहा गया।

मेंडलीफ का आवर्त नियम :- 

तत्वों का सर्वप्रथम आवर्ती वर्गीकरण मेंडलीफ द्वारा किया गया था। आवर्त सारणी का निर्माण 1869 में मेंडलीफ द्वारा किया गया था। मेंडलीफ के अनुसार किसी तत्व के रासायनिक व भौतिक गुण उस तत्व के परमाणु भार के आवर्ती फलन होते हैं। यहां आवर्ती फलन से तात्पर्य यह है कि यदि इन तत्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते हुए क्रम में रखा जाए तो समान भौतिक व रासायनिक गुण वाले तत्वों की एक निश्चित समय अंतराल के बाद उनके गुणों में पुनरावृत्ति होती है।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी :- 

• आवर्त सारणी में 36 खानों को आवर्त तथा ऊर्ध्वाधर खानों को वर्ग कहते हैं।
• मेंडलीफ द्वारा 7 आवर्त एवं 9 वर्गो का निर्माण किया गया था।
• आवर्त सारणी में तत्वों को उनके परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में रखा गया है।
• वर्गों की संख्या 1 से 8 व एक शून्य वर्ग जो कि अक्रिय गैसों का है जिसे बाद में जोड़ा गया। क्योंकि मेंडलीफ में जब आवर्त सारणी बनाई उस समय अक्रिय गैसों की खोज नहीं हुई थी।
• आठवें व शून्य वर्ग को छोड़कर अन्य सभी वर्ग A व B में विभाजित है।
• वर्ग 8 वें वर्ग में तीन- तीन तत्वों को समूह में रखा गया है। अतः इस वर्ग में कुल 9 तत्व है।
• एक आवर्त में बाएं से दाएं ओर जाने पर तत्वों के गुण में क्रमिक परिवर्तन होता है, जबकि एक वर्ग के तत्वों के रासायनिक गुण लगभग समान होता है।

आधुनिक आवर्त नियम :- 

इस सारणी का निर्माण 1913 में मौझले द्वारा किया गया था। मौझले ने यह सिद्ध किया कि तेज गति के इलेक्ट्रॉन की धातु पर बौछार कराने पर प्राप्त X- किरणों की आवृत्ति (v) का वर्गमूल धातु के परमाणु के नाभिकीय आवेश के समानुपाती होता है।

आधुनिक आवर्त सारणी :- 

• मौझले के अनुसार किसी तत्व के भौतिक एवं रासायनिक गुण उसके परमाणु क्रमांक की आवर्ती फलन होते हैं।
• आधुनिक आवर्त सारणी में सात आवर्त एवं अट्ठारह वर्गों का निर्माण किया गया था।
• वर्तमान समय में ज्ञात तत्वों की संख्या 118 है।
• मौझले द्वारा आधुनिक आवर्त सारणी को चार भागों में बांटा गया है।

(¡) S -block (वर्ग- 1, 2) :- 
• वर्ग 1 के तत्व क्षार धातु तत्व कहलाते हैं।
• प्रथम वर्ग में पाई जाने वाली एकमात्र अधातु हाइड्रोजन (H) होती हैं और 2 वर्ग के तत्व क्षारीय मृदा धातु तत्व कहलाते हैं।

(¡¡) P -block (वर्ग-13,14,15,16,17,18) :- 
• वर्ग 14 के तत्वों का गलनांक उच्च होता है और वर्ग 15 के तत्व निकोंजेन्स कहलाते हैं। जिसका अर्थ- खाद बनाने से होता है।
जैसे- नाइट्रोजन, फास्फोरस।
• वर्ग 16 के तत्व चैल्कोजन कहलाते हैं। जिसका अर्थ- लवण बनाने से होता है।
जैसे- क्लोरीन क्लोरीन आयोडीन आदि।
• 17 वर्ग में हैलोजनों आते हैं
• सर्वाधिक क्रियाशील हैलोजन फ्लोरीन होता है तथा सबसे कम क्रियाशील आयोडीन होता है।
• कांच पर प्रहार करने वाले हैलोजन फ्लोरीन (F)  होती है।
• आयोडीन एकमात्र हैलोजन है जो ऊर्ध्वपातज है।
• 70 के वर्ग में पाए जाने वाले एकमात्र द्रव अधातु ब्रोमीन (Br) होती है।
• रेडियो एक्टिव एकमात्र हेलोजन एस्टेटिन हैं।

(¡¡¡) D -block :- 
• D -block के तत्वों को संक्रमण तत्व या परिवर्तन धातु तत्व कहा जाता है।
• 11 वें वर्ग के तत्व सिक्का धातु तत्व कहलाते हैं।
जैसे- सोना चांदी तांबा आदि।
• 12 वें वर्ग में पाए जाने वाली एकमात्र द्रव धातु पारा होती हैं।

(¡v) F -block :- 
• F -block के तत्वों को आंतरिक संक्रमण तत्व कहा जाता है।
F -block के तत्वों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है –

(a) लैंथेनाइड श्रेणी :- परमाणु क्रमांक 57 से 71  तक के लौन्थेनॉन तत्व कहलाते हैं। प्रकृति में कम पाए जाने के कारण इन्हें दुर्लभ मृदा धातु तत्व कहते हैं।

लैंथेनाइड तत्वों को याद करने की ट्रिक :-

Trick- लड़ाई के लिए सीमा पर ना दो सामान पीएम यू गद्दार तबाही दोबारा होगी और तुम यहां लुटोगे ।

लेंथेनम                  La                लड़ाई
सीरियम                 Ce                सीमा
प्रेसडिमियम            Pr                 पर
नियोडामिमियम      Nd                 ना
प्रोमिथियम             Pm               पीएम
सैमरियम                Sm              सामान
यूरोपियम                Eu                यू
गैडोलोनियम           Gd               गद्दार
टर्बियम                   Tb              तबाही
डिस्प्रोसियम            Dy               दोबारा
होलामियम              Ho               होगी
उर्बियम                   Er                और
थूलियम                  Tm               तुम
यटेरबियम               Yb                यहां
लुथियम                  Lu               लुटोगे


(b) एक्टिनाइड श्रेणी :-  
• परमाणु क्रमांक 89 से 103 तक के तत्व एक्टिव तत्व कहलाते हैं।
• हीलियम सर्वाधिक आयनन विभव क्षमता वाला होता है।
• सर्वाधिक इलेक्ट्रॉन बन्धता क्लोरीन में होता है।
• सबसे कम इलेक्ट्रॉन बन्धता अक्रिय गैसों में होती है।
• सर्वाधिक विद्युत ॠणता वाला तत्व फ्लोरीन होता है।
• सबसे कम विद्युत ॠणता वाला तत्व सीजियम है।
• हीलियम गैस छोड़कर सभी अक्रिय गैसों के ब्राह्मतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं।

Note :- D -block के  ¡¡B / 12 वाँ वर्ग में उपस्थित तत्व जिन्क (Zn), कैडमियन (Cd), पारा (hg) संक्रमण तत्व नहीं कहलाते हैं।
D -block के ¡B / 11 वाँ वर्ग में उपस्थित तत्व तांबा, चांदी, सोना सिक्का धातु कहलाते हैं।

दोस्तों यहां पर कई लोगों ने यह प्रश्न पूछा है कि 

प्रश्न- राई में कौन-कौन से तत्व पाए जाते हैं ?
उत्तर :- राई में खनिज तत्व, कार्बन के यौगिक तथा विटामिन जैसे तत्व पाए जाते हैं।

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