ध्वनि क्या है, यह कितने प्रकार के होती है और कैसे उत्पन्न होती हैं

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ध्वनि ऊर्जा का वह रूप होती है जिसे मानव के कानों द्वारा सुना जा सकता है। इन ध्वनि तरंगों को हम बोलकर या किसी वस्तु को धकेलकर व रगड़कर उत्पन्न कर सकते हैं। 

ध्वनि क्या है, यह कितने प्रकार की होती है और इसकी अधिकतम गति कहां तक होती है एवं यह कैसे उत्पन्न होती है। आपको इस पोस्ट में इन सारी चीजों के बारे में जानकारी पढ़ने को मिलेगी।

1. ध्वनि क्या है, यह उत्पन्न कैसे होते हैं

ध्वनी वह यांत्रिक तरंग ऊर्जा है, जिसे मनुष्य के कानो द्वारा सुना जा सके ध्वनि कहलाती हैं।
ध्वनि का सर्वाधिक बैग स्टील या इस्पात में होता है। वायु में ध्वनि का वेग 332 मीटर प्रति सेकंड होता है और निर्वात में ध्वनि का वेग शुन्य होता है।
यही कारण है कि अंतरिक्ष में बात करना कठिन होता है अतः बात करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।

ध्वनि क्या है, यह कितने प्रकार के होती है और कैसे उत्पन्न होती हैं
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आवर्ती परिसर के आधार पर ध्वनि तरंगे तीन प्रकार की होती है :-
(¡) श्रव्य ध्वनि तरंग
(¡¡) अवश्रव्य ध्वनि तरंग
(¡¡¡) पराश्रव्य ध्वनि तरंग

(¡) श्रव्य ध्वनि तरंग :- वे तरंगे जिनकी आवर्ती 20 Hz से लेकर 20000Hz होती है श्रव्य ध्वनि तरंग कहलाती हैं।
• इन ध्वनि तरंगों को मनुष्य के कानों द्वारा आसानी से सुना जा सकता है।

(¡¡) अवश्रव्य ध्वनि तरंग :- वे तरंगे जिनकी आवर्ती 20Hz से कम होती है अवश्रव्य ध्वनि तरंग कहलाती है।
• इन ध्वनि तरंगों को मनुष्य के कानों द्वारा नहीं सुना जा सकता है।
जैसे :- हृदय की धड़कन, भूकंपीय तरंग

(¡¡¡) पराश्रव्य ध्वनि तरंग :- इन ध्वनि तरंगों की आवृत्ति 20000Hz से अधिक होती है।
• इन ध्वनि तरंगों को कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ और डॉल्फिन आदि जीवों द्वारा आसानी से सुना जा सकता है।
• इलेक्ट्रोकार्डियो ग्राफी (ECG), अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) एवं सोनार यंत्र में पराश्रव्य ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है।
• सोनार का पूरा नाम है – साउंड नेवीगेशन एंड रैगिंग।

2. ध्वनी के गुण

(¡) तीव्रता :- ध्वनि का ऐसा गुण जिसमें उसके तीव्र एवं मंद होने का पता चलता है, तीव्रता कहलाती है।
• ध्वनि की तीव्रता को Decibel में मापा जाता है।
• जिनकी तीव्रता अधिक होती है वे ध्वनि तरंग तेज सुनाई देती है जबकि जिनकी तीव्रता कम होती है वे ध्वनि धीमी सुनाई देती है।
जैसे- मच्छर के भिनभिनाहट की अपेक्षा शेर की दहाड़ ने की आवाज का तेज सुनाई देना।

(¡¡) तारत्व :- ध्वनि का ऐसा गुण जिसमें उसके मोटी एवं पतले होने का पता चलता है तारत्व कहलाती है।
जैसे- पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की आवाज का पतली सुनाई देना। क्योंकि महिलाओं की आवाज में तारत्व अधिक होता है।

(¡¡¡) गुणत्ता :- ध्वनि का ऐसा गुण जिसमें समान तीव्रता एवं तारत्व की ध्वनि तरंग में अंतर स्पष्ट किया जा सकता है तो इसे गुणत्ता कहते हैं।
जैसे- बाहर खड़े व्यक्ति को बिना देखे उसकी आवाज से पहचान लेना।

3. ध्वनि की घटनाएं

(¡) ध्वनि का विवर्तन :- ध्वनि तरंग का किसी अवरोध किनारे से मुड़कर सुनाई देना की घटना ध्वनि का विवर्तन कहलाती हैं।
• ध्वनि का विवर्तन प्रकाश से अधिक होता है।
जैसे- बंद कमरे में टीवी चलाने पर चित्रों के अपेक्षा ध्वनि का पहले सुनाई देना।

(¡¡) प्रतिध्वनी :- ध्वनि तरंग का किसी परावर्तक पृष्ठ से टकराकर बार-बार सुनाई देने की घटना प्रतिध्वनी कहलाती है।
• प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता व परावर्तक पृष्ठ की बीच की दूरी न्यूनतम 16.4 मीटर या 17 मीटर होनी चाहिए।
• परावर्तक पृष्ठ जितना बड़ा होगा प्रतिध्वनी उतनी ही स्पष्ट सुनाई देगी।

(¡¡¡) अनुरणन :- किसी ध्वनि स्रोत के बंद होने के कुछ समय बाद ध्वनि का सुनाई देने की घटना ही अनुरणन कहलाती है।
जैसे- बादलों के गरजने की आवाज का सुनाई देना, दूर चले पटाखे की आवाज का सुनाई देना।

4. अनुनाद

यदि बाह्य बल की आवर्ती स्वाभाविक आवर्ती के बराबर या अधिक कर दी जाए तो दोलनो का आयाम अधिक बढ़ जाता है जिसे अनुनाद कहा जाता है।
जैसे- • बंद कमरे में लाउडस्पीकर चलाने पर बर्तनों का नीचे गिरना।
• 1839 में अमेरिका का टोकोमो पुल अनुनाद के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसी कारण पुल पार करते समय सैनिकों को कदम ताल मिलाकर नहीं चलने की सलाह दी जाती है।

5. डॉप्लर प्रभाव

 

जब ध्वनि स्रोत एवं श्रोता के मध्य आपेक्षिक गति होती है तो मूल ध्वनि से पृथक ध्वनि सुनाई देती है, जिसे डॉप्लर प्रभाव कहा जाता है।
डॉप्लर प्रभाव जॉन डॉप्लर द्वारा प्रति पारित किया गया था।
जैसे- • अपनी ओर आती हुई रेलगाड़ी की सीटी की आवाज।
• वायुयान की दूरी एवं आकाशीय पिंडों का वैग का निर्धारण डॉप्लर प्रभाव पर आधारित है।

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