मधुमेह रोग क्या है, इसके लक्षण क्या है, एवं बचाव कैसे करें ?

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डायबिटीज फिलहाल व्यस्क, नौजवान, देश व उम्र की सीमाओं को पार चुका है। इसके मधुमेह के मरीजों का लगातार आंकड़ा बढ़ता जा रहा है जो चिंता का विषय बन गया है। 

भारत में डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में 25 साल से कम आयु के युवा भी दिख रहे हैं। डायबिटीज के कारण हमारा शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है।
डायबिटीज को मधुमेह नाम से भी जाना जाता है।
मधुमेह हमारी खराब जीवनशैली के कारण उत्पन्न होने वाला एक खतरनाक रोग है। हमारे खून में लगातार शुगर की अधिकता मधुमेह का संकेत देती है।

 मधुमेह रोग क्या है, इसके लक्षण क्या है, एवं बचाव कैसे करें ?
मधुमेह रोग 

मधुमेह रोग के लक्षण 

• भूख अधिक लगना।
• बढ़ती प्यास एवं पेशाब में वृद्धि होना।
• कमजोर व थकान महसूस करना।
• हमेशा सिर दर्द रहना और मोटापा बढ़ना।
• नपुंसकता का होना भी मधुमेह के लक्षण है।

शुगर को दो भागों में बांटा जाता है।
(¡) खाली पेट (फास्टिंग)
(¡¡) खाना खाने के बाद (पॉस प्रेन्डियर)

(¡) खाली पेट (फास्टिंग) :- फास्टिंग का मतलब है, कि जिस व्यक्ति का शुगर लेवल 125 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर है तो उस व्यक्ति में डायबिटीज होने की संभावना रहती हैं।

(¡¡) खाना खाने के बाद (पॉस प्रेन्डियर) :- व्यक्ति के खाना खाने के दो घंटे बाद शुगर की मात्रा 145 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक होगी तो उस व्यक्ति को मधुमेह का रोगी कह सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली डायबिटीज सीमित समय के लिए होती है जो गर्भावस्था के दौरान पहली बार देखी जाती है जिसे हम Gestational Diabetes Mellitus के नाम से जाना जाता है।

डायबिटीज दो प्रकार के होती हैं।
(¡) टाइप -1                  (¡¡) टाइप -2

(¡) टाइप -1 डायबिटीज :- इस तरह की डायबिटीज को ज्यादातर 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। टाइप -1 डायबिटीज की वजह होती है हमारे शरीर में Pancreas के Beta Cells से निकलने वाला इंसुलिन हार्मोन निकलना बंद हो जाता है। इंसुलिन ही वो हार्मोन है जिसकी जरूरत भोजन को ऊर्जा में बदलने की होती है।

कारण :- छोटे बच्चों में इस डायबिटीज के होने का कारण है कि इन बच्चों में यह इंसुलिन बनाई ही नहीं या जितने हमारे शरीर को उसकी मात्रा चाहिए उतना निकलता ही नहीं जिसकी वजह से इंसुलिन हार्मोन निकलता है वो Beta Cells खत्म हो गये हैं।

(¡¡) टाइप -2 :- आजकल हमारे देश में ज्यादातर लोग टाइप -2 डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। टाइप -2 डायबिटीज में हमारे शरीर के अंदर इंसुलिन का निर्माण तो होता है परंतु वह शरीर की आवश्यकता के अनुसार निर्माण नहीं कर पाता है।

कारण :- व्यस्क लोगों में डायबिटीज होने का कारण टाइप -2 डायबिटीज में Beta Cells इंसुलिन का निर्माण पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाते हैं। टाइप -2 डायबिटीज में इंसुलिन का कार्य करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। यह डायबिटीज कई बार किसी बीमार के कारण भी उत्पन्न हो सकती है।

घरेलू उपचार 

नींबू :- डायबिटीज के रोगी को बार-बार प्यास अधिक लगती है तो वह इस अवस्था में पानी में नींबू निचोड़ कर पीये। ऐसा करने से प्यास की अधिकता में कम होने लगती है।

गाजर-पालक:- मधुमेह के रोगियों को गाजर व पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। जिससे डायबिटीज कम होने की संभावना होती है। ऐसा करने से आंखों की कमजोरी भी दूर होती हैं।

जामुन :- डायबिटीज के उपचार में जामुन एक श्रेष्ठ अौषधी होती है। इसलिए जामुन को मधुमेह के रोग का फल कहा जाता है। जामुन की गुठली का रस, छाल और गुदा सभी प्रकार के मधुमेह में फायदेमंद होता है। जामुन की गुठली में जाम्बोलिन नाम का तत्व पाया जाता है जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है।

शलजम :- मधुमेह के रोगी को लौकी, परवल, तोरई पपीता व पालक आदि फल व सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। शलजम खाने से हमारे शरीर के रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होती है।

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