मानव जीवन का उद्देश्य क्या है

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आज के इस संसार में हर कोई व्यक्ति पैसे कमाने के पीछे भाग रहा है। एक-दूसरे व्यक्ति को पीछे छोड़ना ही जिंदगी बन गई है। हर कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिंदगी की दौड़ में शामिल है।

संसार में हर कोई व्यक्ति द्वेष व ईर्ष्या की भावना से अपनी ज़िन्दगी को जीता हैं। हर कोई इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि उसके पास अपने परिवार, मित्र, रिश्तेदार एवं पत्नी- पुत्र से बात करने के लिए भी समय नहीं है, ईश्वर को जानना तो दूर की बात है। हर कोई इंसान पैसे कमाने के लालच में अपने लक्ष्य एवं ईश्वर ज्ञान के मार्ग को भूल चुके हैं।
आज के इंसान ने परमात्मा को भी कई रूप में बांट दिया है और अपने-अपने ईश्वर को श्रेष्ठ बताने में लगे।

मानव जीवन का उद्देश्य क्या है आइयें जानतें है  - Simple Health Meter
Manav Jeevan Ka Uddeshy

क्या यही हमारा जीवन है कि हमें जन्म से लेकर मृत्यु तक संघर्ष करना और द्वेष भावना से जीना चाहिए। क्या यही है हमारे जीवन का अर्थ एवं उद्देश्य है?
बार-बार जन्म लेने से व बार-बार मरने से छुटकारा पाना, यही मानव जीवन का परम उद्देश्य हैं। मतलब- ‘मोक्ष प्राप्त करना’।
मानव जीवन ईश्वर का वरदान है और इस जीवन में थोड़ा बहुत ईश्वर को जानना जरूरी है। हमारा जीवन तभी सफल होगा जब हम किसी व्यक्ति के काम आए।
हमें ईश्वर ने इस लायक बनाया है कि हम ईश्वर के ज्ञान को प्राप्त कर सके, तीर्थों में आ जा सके। इसके बावजूद हम अपना कल्याण नहीं कर सके तो हमसे बड़ा पापी इस दुनिया में कोई नहीं है।
लोगों को हमेशा एक-दूसरे व्यक्ति से शिकायत रहती है कि उस व्यक्ति ने मेरा बुरा कर दिया है, उस व्यक्ति ने मुझे भारी नुकसान दे दिया है लेकिन दुनिया ने आपको जितने भी नुकसान दिए हैं वह भरे जा सकते हैं परन्तु आप जो स्वयं का नुकसान कर रहे वह कभी भरा नहीं जा सकता।
व्यक्ति जितना अपने शरीर को स्वस्थ रखता है उतना ही अपने मन या आत्मा को स्वच्छ रखना चाहिए।
लाखों रुपए व्यक्ति अपने कपड़े, घर एवं शरीर पर लगा देता है क्या कभी सच्चे मन से ईश्वर के चरणों में दान किया है।
व्यक्ति को अपने जीवन में सुखी रहने के लिए शरीर के लिए खाने के लिए दो वक्त की रोटी एवं एक मकान सबसे छोटी आवश्यकता है और जिन लोगों को यह भी नसीब में नहीं होता है उन लोगों की मदद करना आपके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य की बात है। तभी आप अपने जीवन में सफल हो सकते हैं।
अगर आज हमारे इस संसार में हमारी बहन-बेटियां असुरक्षित है तो इसमें सबसे बड़ा हाथ इस फिल्मी दुनिया का हैं। ये लोग ऐसी-ऐसी फिल्में दिखाते हैं कि ना कुछ बालक भी उत्तेजित हो उठते हैं। दुर्भाग्य से यह बात जो करता है लोगों द्वारा उसका ही पुंतला फूंक दिया जाता हैं ऐसी है हमारी यह दुनिया।
व्यक्ति का दृष्टिकोण देखने व सुनने से ही बनता है जब गंदा देखेंगे तो अच्छा बनेंगे कैसे और गंदा सुनेंगे तो अच्छा बोलेंगे कैसे।
कभी आपने सोचा है कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है? व्यक्ति का उद्देश्य पैसे कमाना और अच्छे घरों में रहना ही नहीं है इसका उद्देश्य मनुष्य और परमात्मा के बीच एक संबंध होना एवं ईश्वर को जानना हैं।
अगर आपको अपने जीवन में बदलाव लाना है तो आपको ईश्वर के ज्ञान को पहचानना है और इसके लिए सबसे पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है। मनुष्य को द्वेष, ईर्ष्या आदि को छोड़कर सही मार्ग पर ईश्वर को जानना ही सबसे जरूरी है यही हमारे जीवन का अर्थ एवं उद्देश्य है।

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