मानव तंत्रिका तंत्र की परिभाषा, प्रकार, कार्य और मस्तिष्क के कार्य, nervous system

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मानव शरीर का वह तंत्र जो शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का संतुलन स्थापित करने के साथ सोचने, समझने एवं किसी चीज को याद रखने का कार्य करता है तंत्रिका तंत्र कहलाता है। 

आज के इस अध्याय में हम मानव तंत्रिका तंत्र की परिभाषा, प्रकार, कार्य और मस्तिष्क के कार्य, एवं उनका वर्गीकरण, nervous system का अध्ययन करेंगे।

मानव तंत्रिका तंत्र की परिभाषा, प्रकार, कार्य और मस्तिष्क के कार्य, nervous system
Human Nervous System 

तंत्रिका तंत्र का अध्ययन न्यूरोलॉजी विज्ञान में किया जाता है। मानव शरीर की लंबी कोशिका तंत्रिका तंत्र हैं। मानव शरीर तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी इकाई न्यूरोन हैं। तंत्रिका तंत्र का अध्ययन न्यूरोलॉजी में किया जाता है। केन्द्रिय तंत्रिका तंत्र का उदाहरण मस्तिष्क हैं। मस्तिष्क की सुरक्षा में हड्डियों की संख्या 8 हैं। आठ हड्डियां लिगामेन्ट के सहारे जुड़कर क्रेनियम नामक खोज का निर्माण करती हैं। मानव मस्तिष्क के तीन भाग होते है।
तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाओं, संवेदी अंगों एवं तंत्रिका कोशिकाओं का बना होता है।

1. मानव मस्तिष्क 


मानव मस्तिष्क का भार पुरुषों में 1400 ग्राम तथा महिलाओं को 1300 ग्राम के लगभग पाया जाता है। मानव मस्तिष्क में सर्वाधिक मात्रा में जल पाया जाता है। मानव मस्तिष्क में सबसे कम पुनरुध्दभवन की क्षमता पाई जाती है। मानव मस्तिष्क को अध्ययन की दृष्टि से तीन भागों में बांटा गया है।
(¡) अग्र मस्तिष्क  (¡¡) मध्य मस्तिष्क (¡¡¡) पश्य मस्तिष्क

(¡) अग्र मस्तिष्क :- अग्र मस्तिष्क मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा 2 तिहाई भाग लिए हुए होता है। अग्र मस्तिष्क का सबसे महत्वपूर्ण भाग सेरीब्रम है। सेरीब्रम में ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त उद्दीजनों को ग्रहण किया जाता है जिससे जानकारियां होती है। मानव की ताजा स्मृति (याददाश्त) सेरीब्रम में होती है। मानव मस्तिष्क के सेरीब्रम भाग में अधिकांश क्रिया जैसे- चलना, बोलना, बात करना, याद रखना, पढ़ना-लिखना आदि है। सेरीब्रम भाग मानव मस्तिष्क की इच्छा शक्तियों का केंद्र है अर्थात क्रिया को नियंत्रण रखने का कार्य सेरीब्रम करता है। सेरीब्रम मानव में जानकारियों का संग्रह करता है।

थैलेमस :- मस्तिष्क के थैलेमस भाग में हमें ठंडे व गर्म का एहसास होता है।

हाइकोथैलेमस :- मस्तिष्क के हाइकोथैलेमस भाग में विश्लेषण किया जाता है। हाइकोथैलेमस भाग शरीर के तापमान का नियंत्रण रखता है। जिस कारण हाइपोथैलेमस भाग को थर्मोस्टेट कहा जाता है। मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस भाग में भूख और प्यास पर नियंत्रण रखा जाता है। मस्तिष्क के इस भाग में भावनात्मक विचार जैसे- गुस्सा,  नफरत, ग्रहण, लगाव, ईर्ष्या आदि का उद्भव होता है।

(¡¡) मध्य मस्तिष्क :- मध्य मस्तिष्क का दूसरा नाम अनु मस्तिष्क है जो मानव शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायक है। मदमस्त एक मानव शरीर की दो महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रियों आंख व कान पर नियंत्रण रखने का कार्य करता है। आंख एवं कान मानव शरीर का संतुलन बनाते हैं। मानव देखकर व सुनकर संतुलन बनाता है। मानव नेत्र और कान पर ध्वनि व प्रतिबिंब 1/10 सेकेंड तक रहता है।

सेरीबेलम :- सेरीबेलम मध्य व पश्य भाग का महत्वपूर्ण भाग हैं। वे पश्य गिना जाता है। शराब पीने से व्यक्ति का सेरीबेलम वाला भाग प्रभावित होता है जिससे व्यक्ति के मस्तिष्क का संतुलन खराब हो जाता है।

(¡¡¡) पश्य मस्तिष्क :- पश्य मस्तिष्क, मस्तिष्क का वह भाग है जहां से शरीर की अनेएच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण किया जाता है।
जैसे- हृदय का धड़कना, आहार नाल की गति, पलक झपकना, एवं श्वसन आदि।

2. केंद्रीय तांत्रिका तंत्र


तंत्रिका तंत्र का वह भाग जो संपूर्ण शरीर के साथ स्वयं तंत्रिका पर नियंत्रण रखता है केंद्रीय तंत्रिका तंत्र कहलाता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु दोनों मिलकर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं। मेरुरज्जु का बढ़ा हुआ भाग मस्तिष्क है।

3. मेरुरज्जु


मेडुला औब्लागेटा का पिछला भाग मेरुरज्जु ही बनाता है। मेरुरज्जु के चारों ओर पायमेटर, ड्यूरमेटर और अॉक्रायड का आवरण पाया जाता है। मेरुरज्जु का पिछला शिरा पतले सूत्र के रूप में होता है। मेरुरज्जु बेलनाकार खोखली तथा प्रतिपृष्ठ पर चपटी होती है। मेरुरज्जु के बीच में एक सकरी नाल पाई जाती है जिसे केंद्रीय नाल कहते हैं। इस नाल में सेरीब्रोस्पाइनल द्रव्य भरा रहता है।

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