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Latest News On Coronavirus : अब होगा कोरोना का खात्मा

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नमस्कार स्वागत है आप सबका, आप सबके लिए खुशखबरी है ! मरुधरा में कोरोना के मरीज पूरी तरह ठीक हो रहे हैं। कोरोना वायरस के खिलाफ पूरी दुनिया में विश्व युद्ध छिड़ा हैं। 

आपके लिए एक खुशखबरी है कि राजस्थान में  कोरोना संक्रमित मरीज धीरे धीरे ठीक होने जा रहे हैं। हर कोई देश इसकी दवा बनाने में जुटा है इस बीच पहले से मौजूद किसी और तरह की दवाइयां अपना रंग कोरोना पर दिखा रही है।
वैसे तो कोरोना ने देश में अपने पैर पसार लिए हैं। भारत में अब तक इस वायरस के मामले 108 हो चुके हैं। जिनमें सबसे अधिक महाराष्ट्र में 31 मामले सामने आए हैं। हालांकि अब तक कोरोना की कोई भी दवा नहीं बन पाई है। लेकिन राजस्थान के जयपुर में कुछ दवाई कमाल दिखा गई।

Covid -19 : अब होगा कोरोना का खात्मा, जयपुर के डॉक्टरों ने ढूंढ लिया इलाज

जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के डॉक्टरों ने इसकी दवा बनाकर विदेशी मरीज का इलाज किया। इन डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू, मलेरिया व एचआईवी की दवा के जरिए कोरोना वायरस संक्रमित विदेशी नागरिक का इलाज किया गया और वह ठीक भी हो गया।

चिकित्सकों का कहना है कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी जयपुर के डॉक्टरों की ओर से कोरोना के इलाज के लिए अपनाए गए इस प्रोटोकॉल पर संतोष जताया है।

जयपुर में इटली से आए 69 वर्षीय नागरिक को प्रदेश का पहला कोरोनावायरस पॉजिटिव घोषित किया गया था। बाद में उसकी पत्नी भी कोरोनावायरस से पॉजिटिव पाई गई। दोनों को जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के आइसोलेशन अस्पताल में भर्ती कर इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने एंड्री की पत्नी को हाल ही में की गई जांच में कोरोना नेगेटिव पाया गया है।

जयपुर के डॉक्टरर्स ने मलेरिया, स्वाइन फ्लू और HIV की दवा के जरिए कोरोनावायरस पर काबू पाने में सफलता हासिल की है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज की सीनियर प्रोफेसर डॉक्टर पीएस पीपलीवाल का कहना है कि अभी तक कोई दवा इस वायरस में काम नहीं आई है लेकिन जयपुर में जो इलाज किया गया वह उस पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने भी संतोष जताया है।

कोरोना के मरीज को स्वाइन फ्लू के इलाज में दी जाने वाली ओ ओसाल्टामिविर कि 75 mg की दो टेबलेट रोजाना दी गई। वहीं HIV के इलाज में काम आने वाली दवा लोपिनाविर 200 mg तथा राइटोनाविर की 50 mg टेबलेट दी गई और मलेरिया के इलाज में काम आने वाली क्लोरोक्वीन दवा भी दी गई। इन सभी दवाओं का असर भी पॉजिटिव है जो हमारे लिए एक सुखद खबर हैं ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत कई देशों में कोरोना से निपटने के लिए टीका तलाशनें के काम में जुटे है लेकिन अभी तक कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन इसी बीच जयपुर के चिकित्सकों का काम बहुत ही सराहनीय है।

यूं तो कोरोना की दवा की खोज चल रही तब तक कोरोना का बचाव ही इसकी दवा है। कोरोना को रोकना है तो संक्रमित लोगों के संपर्क को रोकना होगा।
मोदी सरकार की कोरोना को लेकर गठित मंत्री समूह की बैठक में कई फैसले लिए गए- जिनमें 15 अप्रैल तक सभी विदेशियों के वीजा को निलंबित कर दिया गया।

जिनमें दूतावास, यूएन और सरकारी अधिकारियों को छूट दी गई तथा स्वदेश लौटने वाले भारतीयों को 14 दिन तक आइसोंलेशन में रहना होगा। किसी आपात में भारतीय मिशन से अनुमति लेनी होगी। इन सभी फैसलों के बाद भारत ने स्वयं को दुनिया से अलग कर लिया है।

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

दोस्तों स्वागत है आपका हमारी वेबसाइट Simple Health Meter में। आज के इस अध्याय में हम आपको बताने वाले हैं की आप अपनी वेबसाइट या ब्लॉग को डोमेन नेम से कैसे जोड़ते हैं। 

बहुत से ऐसे लोग हैं जिन पर डोमेन नेम को अच्छी तरीके से वेबसाइट से नहीं जोड़ पाते उसके कारण हमारी वेबसाइट खुल पाती ही नहीं है। तो दोस्तों आज के इस अध्याय को आप ध्यान पूर्वक पढ़ें और हमारे इन चित्रों के माध्यम से आप अपनी साइट को डोमेन नेम से जोड़ सकते हैं।

सबसे पहले आपको डोमेन नेम प्रदान करने वाली साइट पर जाना। जैसे- मैंने Go Daddy से अपना डोमेन नेम लिया है। आपको यहां पर कुछ इस तरह का पेज ओपन होगा।

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

यहां से आपको अपना डोमेन नेम सर्च करना है जो भी आपका डोमेन नेम है उसके बाद आपको Continue to Cart पर क्लिक करना है।

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

Continue to Cart पर क्लिक करने के बाद आपको कुछ इस तरह का नया पेज ओपन होगा। यहां पर आपको तीनों में No Thanks करना है और फिर Continue to Cart पर क्लिक करना है।

सबसे पहले आपको नया खाता बनाये ( Create an Account) लिखा हुआ है, उसमें अपनी ईमेल, यूजरनेम व पासवर्ड लगाकर अकाउंट बनाना है या आपने पहले अकाउंट बना लिया है तो लॉगिन कर लेना है।
दूसरे ऑप्शन पर पेमेंट में आपको क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, वॉलेट,एवं  यूपीआई में से किसी एक को चुनना है।
तीसरे में बिलिंग इंफॉर्मेशन (Billing Information) पर अपना नाम, फोन नंबर, पता तथा अपनी संपूर्ण जानकारी भर देनी है और सेव पर क्लिक करना हैं।
अगर आपके पास प्रोमो कोड है तो उसको भी आपको लगा देना ताकि आपको डोमेन नेम लेने पर छूट मिल सके। नीचे  Complete Purchase पर क्लिक करना है। इस तरह से आप अपना डोमन नेम खरीदें लेंगे।

दोस्तों इस तरह से आपने डोमेन नेम तो खरीद लिया लेकिन उसको अपनी वेबसाइट से कनेक्ट कैसे करें यह जानना सबसे जरूरी है। उसके लिए मैं इसी अध्याय में आपको जानकारी देने वाला हूं।

दोस्तों आपको फिर से ब्लॉगर की सेटिंग में जाना है और यहां पर Basic में ब्लॉगर एड्रेस में Third Party Domain Setting पर क्लिक करना है। फिर आपने जो भी अपना डॉमेन नेम खरीदा है उसको लगा देना है।

अब आपने जहां पर डोमेन नेम लगाया है उसके नीचे Name, Label या Host लिखा हुआ होगा जबकि दूसरी तरफ Destination, Target या Points to लिखा हुआ होगा।
यहां से आपको हमारी नीचे दी गई फोटो में मार्क किए हुए हैं ठीक उनकी ही तरह आपके ब्लॉगर में दिखाई दे रहे हैं। जैसे- www

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

उनको एक-एक कॉपी करके डोमन वेबसाइट पर DNS पर क्लिक करके ऐड करना है जो नीचे इस फोटो में दिखाई दे रहे हैं ठीक उसी तरह आपको ऐड करने हैं।

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

इतना सब करने के बाद आपको फिर से ब्लॉगर में जाना है और ब्लॉगर एड्रेस में View Setting in struction पर क्लिक करना है ।
क्लिक करने के बाद एक नया पेज ओपन होगा यहां आपको Step 3 पर जाना है और चौथे ऑप्शन पर Google Ips को डोमिन वेबसाइट साइट के DNS के ‘A’ रिकॉर्ड तथा Points में सेव करना है।

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

डीएनएस में जाने के बाद आपको add पर क्लिक करना है और Tittle में सेलेक्ट करना है ‘A’ और Host में लिखना है ‘@’ तथा Points to में आपका गूगल आईपीएस लगाना है और सेव करना है। इस प्रकार आप अपने चारों Google Ips बारी- बारी से लगाये, जो आपको इस नीचे फोटो में दिखाई दे रहे हैं ।

अपनी Blogger में कस्टम डोमेन नेम कैसे जोड़े? Add Custom Domain name

उसके बाद आपको ब्लॉगर में जाना है। यहां पर आपको कुछ इस तरह का पेज दिखेगा।
दोस्तों Https कुछ मिनट बाद लागू होते हैं। इसलिए आपको बार-बार डोमेन नेम न हटाये और DNS को ना बदले ।
तो दोस्तों मुझे आशा है कि है पेज आपको जरूर अच्छा लगा होगा अगर आपको इस पेज के माध्यम से अच्छी जानकारी प्राप्त हुई है तो हमें कॉमेंट एवं फॉलो जरूर करें।

सुबह खाली पेट गर्म पानी के फायदे आइयें जानतें है -Health Tips

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सुबह खाली पेट और रात्रि भोजन के बाद एक-एक गिलास गर्म पानी कुछ समय लगातार पीने से हमारी पाचन से संबंधित समस्याएं दूर होती है। 

आहार में जल को भोजन का जीवन रक्षक कहा जाता है। जल भोजन से भी अधिक महत्व दिया गया है। गर्म जल के नियमित रूप से सेवन करने से हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है। जिससे पेशाव व पसीने के द्वारा शरीर के विषैले व जहरीले पदार्थ आसानी से बाहर
निकलते हैं।

सुबह खाली पेट गर्म पानी के फायदे आइयें जानतें है -Health Tips
चित्र – गर्म जल

सुबह खाली पेट और रात्रि भोजन के बाद एक-एक गिलास गर्म पानी कुछ समय लगातार पीने से हमारी पाचन से संबंधित समस्याएं दूर होती है। और कब एवं गैस जैसी परेशानी भी दूर होने लगती है।

दोस्तों आज भी इस पोस्ट में हम आपको खाली पेट पानी पीने के कई फायदे बताएंगे जो इस प्रकार है।

1. भूख की कमी :- भोजन में अरुचि तथा पेट के भारीपन की समस्या दिखाई देने पर एक गिलास गर्म पानी में नींबू का रस, आधा चम्मच चाय, थोड़ा सा काली मिर्च का पाउडर एवं स्वाद अनुसार नमक डालकर पीने से कुछ ही समय बाद पेट का भारीपन दूर होकर भूख लगना प्रारंभ हो जाता हैं।

2. पेट संबंधित समस्या :- सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से पेट की सारी समस्या ठीक हो जाती है। जिससे आंतों में जमा मल आसानी से निकलने लगता है तथा कब्ज में राहत मिलती है। ऐसा करने से आपका पेट पूरी तरह साफ हो जाता है तथा आप स्वस्थ रहने लगते हैं।

3. विषैले तत्व बाहर निकलना :- खाली पेट भरपूर मात्रा में पानी पीने से शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक एवं विषैले तत्व पसीनें व मूत्र के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं। जिससे हमारे शरीर में विषाणुओं से बचाव रहता और बीमारियां नहीं होती है। सुबह के समय खाली पेट पानी पीने से शरीर की अच्छी तरह से सफाई होती है।

4. वजन कम करने में सहायक :- सुबह के समय खाली पेट पानी पीने से आपके शरीर का उपायचय से 25% तक बढ़ता है जिस कारण आपका वजन आसानी से कम होने लगता है।

5. स्वस्थ त्वचा :- खाली पेट जल पीने से हमारे कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलती है तथा वे सक्रिय रहती हैं। जिससे त्वचा स्वस्थ बनी रहती है। इसके साथ पसीने के माध्यम से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलने पर त्वचा अंदर से साफ हो रहती है और हमारी त्वचा स्वस्थ और चमकदार दिखाई देने लगती है।

6. रोग प्रतिरोधक क्षमता :- जल अवांछित तत्वों को हमारे शरीर में नहीं रहने देता है और शरीर के संपूर्ण अंगों को स्वस्थ बनाए रखता है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता सुबह खाली पेट गर्म जल पीने सेे बढ़ती है।

7. पेशाब संबंधित समस्या से छुटकारा :- सुबह खाली पेट जल हमारे शरीर में बने विषैले तत्व को पेशाब के जरिए बाहर निकालता है। समय-समय पर भरपूर मात्रा में जल पीते रहने से पेशाब में होने वाले यूरिन इन्फेक्शन, जलन आदि समस्याएं ठीक हो जाती है।

गर्म पानी के नियमित सेवन से हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है जिससे पेशाब व पसीने के द्वारा शरीर के सारे जहरीले तत्व आसानी से शरीर से बाहर निकलते रहते हैं। ऐसा प्रतिदिन करने से शरीर का रक्त संचार सुचारू बना रहता है। खाली पेट गर्म पानी पीने से सीने में जलन एवं मूत्र संबंधी समस्याएं दूर होते हैं।

गुरुत्वाकर्षण बल एवं उपग्रह क्या है एवं ग्रहों की गति के नियम

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पांचवी शताब्दी में भारतीय खगोलविद् आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ आर्यभट्टीय में एक सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसमें ग्रहों की कक्षाओं को ‘अधिचक्र’ कहा गया। 

आर्यभट्ट ने एक सूर्य केंद्रीय मॉडल की भी कल्पना की थी, जिसके अनुसार पृथ्वी एक वर्ष में सूर्य की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा करती है व अपनी उत्तर- दक्षिण अक्ष के प्रति एक दिन के घूर्णन काल के साथ भी परिक्रमा करती है।

गुरुत्वाकर्षण बल :- न्यूटन को एक पेड़ से गिरते हुए सेब के फल ने ऐसे बल की कल्पना के लिए प्रेरित किया जो सेब की गति, चंद्रमा पृथ्वी के प्रति प्रतिक्रमण आदि को नियंत्रित करता है तथा विभिन्न खगोलीय पिंडों की गति संतुलन का स्पष्टीकरण प्रदान करता है। इस बल को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं। यह बल एक द्रव्य कण तथा दूसरे द्रव्य कण पर लगने वाला आकर्षण बल होता है।

गुरुत्वाकर्षण एवं उपग्रह क्या है, इनकी परिभाषा क्या है एवं ग्रहों की गति के नियम

न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम :- न्यूटन के अनुसार ब्रह्मांड में प्रत्येक कण अपने द्रव्यमान के कारण अन्य कणों को अपनी ओर आकर्षित करता है। द्रव्य कणों के मध्य लगने वाला यह आकर्षण बल, गुरुत्वाकर्षण बल कहलाता है।

गुरुत्वाकर्षण बल की विशेषताएं :- 
(¡) यह केवल आकर्षण बल होता है।
(¡¡) तुलनात्मक रूप से यह बल सबसे दुर्बल होता है।
(¡¡¡)  इस बल्कि परास बहुत अधिक होती है।

गुरुत्वीय त्वरण :- यदि पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र में m द्रव्यमान के कण द्वारा अनुभव किए जाने वाला गुरुत्वीय बल F हो तो गुरुत्वीय बल F व कण के द्रव्यमान m का अनुपात गुरुत्वीय क्षेत्र की प्रबलता या गुरुत्वीय त्वरण कहलाता है। जिसे g व्यक्त करते हैं।
                                f
                           _______
               g =           m

गुरुत्वीय क्षेत्र की प्रबलता या गुरुत्वीय त्वरण का मात्रक न्यूटन/किलोग्राम या मीटर/सेकंड ² होता है इसकी विमा [M0L1T2] होती है।

गुरुत्वीय त्वरण एक सदिश राशि होती है जिसकी दिशा, गुरुत्वीय बल की दिशा के अनुदिश होती है।

गुरुत्वीय क्षेत्र :- द्रव्य कण के द्रव्यमान के कारण उत्पन्न वह क्षेत्र जिसमें अन्य द्रव कण बल को महसूस करें, गुरुत्वीय क्षेत्र कहलाता है तथा अन्य द्रव्य कणों के द्वारा महसूस किया गया बल गुरुत्वीय बल कहलाता है।

ग्रहों की गति एवं केप्लर के नियम :- ग्रहों की गति का अध्ययन न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के आधार पर सरलता से किया जाता है, किंतु न्यूटन से पहले केप्लर ने प्रेक्षणों के आधार पर प्राप्त निष्कर्षों से ग्रहों की गति के लिए कुछ नियम प्रतिपादित किए, जिन्हें कैप्लर के नियम कहते हैं। जो इस प्रकार है-
1. प्रथम नियम :- केप्लर के प्रथम नियम अनुसार ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घ वृत्ताकार पथ पर परिक्रमण कर रहे हैं एवं सूर्य इस दीर्घ व्रत के दोनों केंद्रों में से किसी एक केंद्र पर होता है।

2. दूसरा नियम :- केप्लर के द्वितीय नियम अनुसार सूर्य एवं ग्रह को मिलाने वाली रेखा ध्रुवान्तर रेखा कहलाती है जो कि समान समय अंतराल में समान क्षेत्रफल पार करती है। इस प्रकार ग्रहों की क्षेत्रीय चाल नियत रहती है। अर्थात जब ग्रह सूर्य से अधिकतम दूरी पर हो तो ग्रह की चाल न्यूनतम होती है। जब न्यूनतम दूरी पर हो तो ग्रह की चाल अधिकतम होती है।

3. तीसरा नियम :- केप्लर के इस नियमानुसार ग्रहों के परिक्रमण काल का वर्ग (T²)  सूर्य के ग्रहों की औसत दूरी के घन (r³) के समानुपाती होता है।

प्राकृतिक एवं कृतिम उपग्रह :- ऐसे आकाशीय पिंड जो ग्रहों की परिक्रमा करते हैं, उन्हें प्राकृतिक उपग्रह कहा जाता है। जैसे- चंद्रमा, पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। यह पृथ्वी के चारों ओर 3.8 × 10 का घात 5 किलोमीटर की त्रिज्या के वृत्ताकार पथ में गति करता है और उसका परिक्रमण काल 273 दिन होता है। चंद्रमा का व्यास 3475 किलोमीटर है।

गुरुत्वाकर्षण एवं उपग्रह क्या है, इनकी परिभाषा क्या है एवं ग्रहों की गति के नियम
Satellite Images 

भूस्थाई उपग्रह :- वे उपग्रह जो पृथ्वी के सापेक्ष होगा एवं निरक्षीय समतल में यह कक्षा भूस्थाई कक्षा होगी। इस प्रकार भूस्थाई उपग्रह का परिक्रमण काल T = 24 घंटे होता है।

ध्रुवीय उपग्रह :- वे कृत्रिम उपग्रह जिनकी कक्षा का तल पृथ्वी की भूमध्य रेखा के लगभग 90 डिग्री के कोण पर हो अर्थात समतल में हो तो उन उपग्रहों को ध्रुवीय उपग्रह कहते हैं। ये उपग्रह उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवों के पास गति करते हैं। उपग्रहों का परिक्रमण काल कुछ घंटे का होता है जो कि पृथ्वी तल से ऊंचाई पर निर्भर करता है।

ध्रुवीय उपग्रह के उपयोग:- 
(¡) ध्रुवीय उपग्रह की सहायता से मौसम के बारे में जानकारी प्राप्त होती है।
(¡¡) विकिरण एवं अन्य वायुमंडलीय खतरों से बचाव हेतु सूचनाएं एकत्रित की जाती है।
(¡¡¡) जलसंपदा तथा खनिज संपदा आदि की सूचनाएं एकत्रित की जाती है।
(¡v) पृथ्वी के वायुमंडल का अध्ययन किया जाता है।
(v) आयनमंडल का अध्ययन किया जाता है।

पलायन वेग :- वह न्यूनतम वेग जिससे पिंड को ऊर्ध्व दिशा में ऊपर की ओर फेंके जाने पर पिंड पृथ्वी के गुरुत्वीय क्षेत्र से बाहर निकल जाए अर्थात पुन: पृथ्वी पर लौट कर नहीं आए तो उस वेग को पलायन वेग कहते हैं।
इसे Ve से व्यक्त करते हैं।

मधुमेह रोग क्या है, इसके लक्षण क्या है, एवं बचाव कैसे करें ?

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डायबिटीज फिलहाल व्यस्क, नौजवान, देश व उम्र की सीमाओं को पार चुका है। इसके मधुमेह के मरीजों का लगातार आंकड़ा बढ़ता जा रहा है जो चिंता का विषय बन गया है। 

भारत में डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में 25 साल से कम आयु के युवा भी दिख रहे हैं। डायबिटीज के कारण हमारा शरीर इंसुलिन का सही उपयोग नहीं कर पाता है।
डायबिटीज को मधुमेह नाम से भी जाना जाता है।
मधुमेह हमारी खराब जीवनशैली के कारण उत्पन्न होने वाला एक खतरनाक रोग है। हमारे खून में लगातार शुगर की अधिकता मधुमेह का संकेत देती है।

 मधुमेह रोग क्या है, इसके लक्षण क्या है, एवं बचाव कैसे करें ?
मधुमेह रोग 

मधुमेह रोग के लक्षण 

• भूख अधिक लगना।
• बढ़ती प्यास एवं पेशाब में वृद्धि होना।
• कमजोर व थकान महसूस करना।
• हमेशा सिर दर्द रहना और मोटापा बढ़ना।
• नपुंसकता का होना भी मधुमेह के लक्षण है।

शुगर को दो भागों में बांटा जाता है।
(¡) खाली पेट (फास्टिंग)
(¡¡) खाना खाने के बाद (पॉस प्रेन्डियर)

(¡) खाली पेट (फास्टिंग) :- फास्टिंग का मतलब है, कि जिस व्यक्ति का शुगर लेवल 125 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर है तो उस व्यक्ति में डायबिटीज होने की संभावना रहती हैं।

(¡¡) खाना खाने के बाद (पॉस प्रेन्डियर) :- व्यक्ति के खाना खाने के दो घंटे बाद शुगर की मात्रा 145 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक होगी तो उस व्यक्ति को मधुमेह का रोगी कह सकते हैं।

गर्भावस्था के दौरान उत्पन्न होने वाली डायबिटीज सीमित समय के लिए होती है जो गर्भावस्था के दौरान पहली बार देखी जाती है जिसे हम Gestational Diabetes Mellitus के नाम से जाना जाता है।

डायबिटीज दो प्रकार के होती हैं।
(¡) टाइप -1                  (¡¡) टाइप -2

(¡) टाइप -1 डायबिटीज :- इस तरह की डायबिटीज को ज्यादातर 20 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखा जाता है। टाइप -1 डायबिटीज की वजह होती है हमारे शरीर में Pancreas के Beta Cells से निकलने वाला इंसुलिन हार्मोन निकलना बंद हो जाता है। इंसुलिन ही वो हार्मोन है जिसकी जरूरत भोजन को ऊर्जा में बदलने की होती है।

कारण :- छोटे बच्चों में इस डायबिटीज के होने का कारण है कि इन बच्चों में यह इंसुलिन बनाई ही नहीं या जितने हमारे शरीर को उसकी मात्रा चाहिए उतना निकलता ही नहीं जिसकी वजह से इंसुलिन हार्मोन निकलता है वो Beta Cells खत्म हो गये हैं।

(¡¡) टाइप -2 :- आजकल हमारे देश में ज्यादातर लोग टाइप -2 डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। टाइप -2 डायबिटीज में हमारे शरीर के अंदर इंसुलिन का निर्माण तो होता है परंतु वह शरीर की आवश्यकता के अनुसार निर्माण नहीं कर पाता है।

कारण :- व्यस्क लोगों में डायबिटीज होने का कारण टाइप -2 डायबिटीज में Beta Cells इंसुलिन का निर्माण पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाते हैं। टाइप -2 डायबिटीज में इंसुलिन का कार्य करने की क्षमता पर भी असर पड़ता है। यह डायबिटीज कई बार किसी बीमार के कारण भी उत्पन्न हो सकती है।

घरेलू उपचार 

नींबू :- डायबिटीज के रोगी को बार-बार प्यास अधिक लगती है तो वह इस अवस्था में पानी में नींबू निचोड़ कर पीये। ऐसा करने से प्यास की अधिकता में कम होने लगती है।

गाजर-पालक:- मधुमेह के रोगियों को गाजर व पालक का रस मिलाकर पीना चाहिए। जिससे डायबिटीज कम होने की संभावना होती है। ऐसा करने से आंखों की कमजोरी भी दूर होती हैं।

जामुन :- डायबिटीज के उपचार में जामुन एक श्रेष्ठ अौषधी होती है। इसलिए जामुन को मधुमेह के रोग का फल कहा जाता है। जामुन की गुठली का रस, छाल और गुदा सभी प्रकार के मधुमेह में फायदेमंद होता है। जामुन की गुठली में जाम्बोलिन नाम का तत्व पाया जाता है जो स्टार्च को शर्करा में बदलने से रोकता है।

शलजम :- मधुमेह के रोगी को लौकी, परवल, तोरई पपीता व पालक आदि फल व सब्जियों का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए। शलजम खाने से हमारे शरीर के रक्त में स्थित शर्करा की मात्रा कम होती है।

अगर खूबसूरत दिखना है तो अपनाइए ये ब्यूटी टिप्स बहुत ही लाभकारी

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आज की इस भागदौड़ की जिंदगी में प्रदूषण एवं धूल से चेहरे का निखार कब चला जाता है पता ही नहीं चलता है। प्रकृति से नवाजे गए हमारे भारत में कई प्रकार की खूबियां हैं। 

प्रकृति द्वारा नवाजे गए हमारे भारत में कई प्रकार की खूबियां है। यहां पाए जाने वाले अधिकतर सौंदर्य उत्पाद  आयुर्वेद होते हैं जिनका इस्तेमाल महिलाएं अपने सौंदर्य को निखारने के लिए करती हैं।
दक्षिण भारत की महिलाएं अपनी बड़ी-बड़ी आंखें, लंबे बाल एवं खूबसूरत त्वचा के लिए जानी जाती है इन महिलाओं के सौंदर्य का रहस्य हमारी प्रकृति में छुपा है।
दोस्तों आज के इस अध्याय में हम खूबसूरत दिखने के लिए उपयोग में लिए जाने वाली टिप्स के बारे में पढ़ेंगे।

अगर खूबसूरत दिखना है तो अपनाइए ये ब्यूटी टिप्स बहुत ही लाभकारी

खूबसूरत दिखने के लिए आपको अधिक पानी पीना चाहिए क्योंकि पानी हीं हमारी त्वचा के लिए सर्वोत्तम औषधि हैं। यह आपकी त्वचा को अद्भुत चमक प्रदान करता है। जिस तरह हमारे शरीर को ऑक्सीजन की जरूरत होती है ठीक उसी तरह हमारी त्वचा के लिए विटामिनों की आवश्यकता होती है। ये विटामिन आपकी त्वचा की चमक नमी को बरकरार रखते हैं।

खूबसूरत दिखने के लिए महत्वपूर्ण टिप्स


1. गुलाब :- गुलाब की पत्तियां हमारी त्वचा को पोषण देती है साथ ही त्वचा को सुगंधित बनाते हैं और ठंडक प्रदान करती हैं। गुलाब के फूलों के रस को चेहरे पर लगाने से ठंडी ताजगी हमेशा बनी रहती है। गुलाब की पत्तियों को फ्रिज में ठंडा करके लगाने से त्वचा को काफी फायदा मिलता है।
दूध तथा केसर लगाने के पश्चात गुलाब के पत्तियां लगाने से त्वचा का कालापन बिल्कुल साफ हो जाता है।

2. नारियल :- दक्षिण भारत में नारियल के पेड़ अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। जिसके कारण यहां के लोग अपने भोजन को नारियल के तेल में ही पकाते हैं। नारियल के तेल की मालिश करने से हमारी त्वचा कोमल होने लगती हैं। नारियल में विटामिन, पोषक तत्व, फाइबर एवं खनिज उच्च मात्रा में होते हैं। दक्षिण भारत के लोगों ने नारियल को अपने दैनिक आहार के रूप में शामिल किया है। नारियल के पानी का सेवन हमारे चेहरे की चमक को बढ़ाता है।

3. टमाटर :- नींबू के रस में टमाटर का रस मिलाकर लगाने से हमारी त्वचा में खुले रोम के क्षेत्रों की समस्या कुछ ही दिनों में दूर होने लगती है टमाटर को काटकर चेहरे पर रगड़ने से तैलीय त्वचा की समस्या दूर होती है।

4. खीरा :- तैलीय त्वचा के लिए खीरा अत्यंत लाभदायक है। खीरे के रस को चंदन के पाउडर में मिलाकर पेस्ट बना लें और इसे चेहरे पर लगाएं। ऐसा प्रतिदिन करने से चेहरे की झाइयां हमेशा के लिए दूर हो जाती है। इसके अलावा ककड़ी के रस में गुलाब जल तथा कुछ बूंदे नींबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरे का रंग बिल्कुल साफ हो जाता है।

5. आयुर्वेद :- प्रकृति ने हमारे भारत को बखूबी से नवाजा है। इसके कारण यहां पाए जाने वाले अधिकतम सौंदर्य उत्पाद पूरी तरह आयुर्वेद होते हैं। इन उत्पादों से हमारे चेहरे व शरीर पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है। ये आपकी त्वचा को मुलायम बनाए रखते हैं।

6. अनुशासित जीवन शैली :- एक अनुशासित जीवनशैली हमारे शरीर को स्वास्थ्य बनाए रखने में  भूमिका निभाती है। सुबह जल्दी उठना, समय पर गहरी नींद लेना, समय पर भोजन करना और अच्छी आदतों का अनुसरण करना अनुशासित जीवन शैली के अंतर्गत आता है। ये सब इंसान को बाहर से ही नहीं बल्कि अंदर से भी सुंदर बनाते हैं।

7.  योग / व्यायाम :- व्यायाम करने से हमारे मन को शांति प्रदान होती है तथा योग इंद्रियों का सिथिल करता है। योगा आपके चेहरे की झुर्रियों व मुंहासों से निजात दिलाकर चेहरे की चमक बढ़ाता है। दक्षिण भारत की महिलाओं के सौंदर्य एवं खूबसूरती के पीछे छिपा राज योगा है।

8. मसाज / मालिश :- रात के समय सोने से पहले नारियल का तेल अपने शरीर पर लगाकर मालिश करने से आपके रक्त परिसंचरण तंत्र में सुधार आएगा और त्वचा कोमल होने लगेगी। कई प्रकार की मसाज थेरेपी का उपयोग शरीर की पीड़ा को दूर करने में किया जाता है। हमारे भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत की मसाज थेरेपी संपूर्ण विश्व में प्रसिद्ध हो गई है। यहां पर की जाने वाली मसाज शरीर की पूरी थकान को दूर कर देती हैं।

न्यूटन की गति के नियम क्या है – Science By Simple Health Meter

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सर्वप्रथम न्यूटन ने 1687 में अपनी प्रसिद्ध पुस्तक प्रिसिप्रिया मैथमेटिक्स में गति के तीन नियमों का प्रतिपादन किया। इन नियमों को न्यूटन में संपूर्ण उदाहरण के साथ समझाया। 

न्यूटन के नियम किसी वस्तु में लगने बाले बल एवं उससे वस्तु की गति में हुए परिवर्तन के बारे में संबंध बताता है। न्यूटन ने सन् 1687 में अपनी पुस्तक प्रिसिप्रियी मैथमेटिक्स में गति के तीनों नियमों की उदाहरण सहित व्याख्या की है।
न्यूटन ने अपनी इस पुस्तक में गति के तीन नियमों का विस्तार से वर्णन किया है।

न्यूटन की गति के नियम क्या है - Science By Simple Health Meter
न्यूटन की गति के नियम 

1. गति का प्रथम नियम :- इसे गैलीलियो द्वारा जड़त्व नियम भी कहते हैं। इस नियम के अनुसार यदि कोई वस्तु स्थिर है तो वह स्थिर ही रहेगी और यदि कोई वस्तु गतिशील है तो वह गतिशील ही रहेगी जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल लगाया नहीं जाए।
उदाहरण- • स्थिर घोड़े केे अचानक चलने पर घुड़सवार का पीछे की ओर झुकना।
• किसी डंडे से कम्मल को पीटने पर धूल एवं मिट्टी के कणों का बाहर निकलना।
• चलती हुई बस या ट्रेन से उतरते समय आगे की ओर मुंह करके उतरना।
• चलती बस में अचानक ब्रेक लगाने पर यात्रियों का आगे की और झुकना।

• गति के प्रथम नियम से बल की परिभाषा ली गई है।

2. गति का दूसरा नियम :- किसी वस्तु पर आरोपित बल उसके संवेग में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है।
                             संवेग में परिवर्तन
आरोपित बल   <  ______________________
                                  समय
           (F = m×a)

• गति के दूसरे नियम से बल का सूत्र प्राप्त होता है।

उदाहरण- • क्रिकेट की की गेंद को पकड़ते समय हाथों का पीछे की और खिसकना।
• कच्चे फर्श की अपेक्षा पक्के फर्श पर गिरने पर चोट आधिक लगना।

3. गति का तीसरा नियम :- इसे क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम भी कहते हैं। इस नियम के अनुसार प्रत्येत क्रिया की बराबर एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
उदाहरण- • बंदूक से गोली चलने पर कंधे का पीछे की और खिसकना।
• रॉकेट यान का उड़ना।
•सतह पर जीवों का चलना।
• नाव से सतह पर कूदनें पर नाव का पीछे की और विस्थापित होना।

मानव तंत्रिका तंत्र की परिभाषा, प्रकार, कार्य और मस्तिष्क के कार्य, nervous system

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मानव शरीर का वह तंत्र जो शरीर के विभिन्न अंगों के कार्यों का संतुलन स्थापित करने के साथ सोचने, समझने एवं किसी चीज को याद रखने का कार्य करता है तंत्रिका तंत्र कहलाता है। 

आज के इस अध्याय में हम मानव तंत्रिका तंत्र की परिभाषा, प्रकार, कार्य और मस्तिष्क के कार्य, एवं उनका वर्गीकरण, nervous system का अध्ययन करेंगे।

मानव तंत्रिका तंत्र की परिभाषा, प्रकार, कार्य और मस्तिष्क के कार्य, nervous system
Human Nervous System 

तंत्रिका तंत्र का अध्ययन न्यूरोलॉजी विज्ञान में किया जाता है। मानव शरीर की लंबी कोशिका तंत्रिका तंत्र हैं। मानव शरीर तंत्रिका तंत्र की सबसे छोटी इकाई न्यूरोन हैं। तंत्रिका तंत्र का अध्ययन न्यूरोलॉजी में किया जाता है। केन्द्रिय तंत्रिका तंत्र का उदाहरण मस्तिष्क हैं। मस्तिष्क की सुरक्षा में हड्डियों की संख्या 8 हैं। आठ हड्डियां लिगामेन्ट के सहारे जुड़कर क्रेनियम नामक खोज का निर्माण करती हैं। मानव मस्तिष्क के तीन भाग होते है।
तंत्रिका तंत्र मस्तिष्क, मेरुरज्जु, तंत्रिकाओं, संवेदी अंगों एवं तंत्रिका कोशिकाओं का बना होता है।

1. मानव मस्तिष्क 


मानव मस्तिष्क का भार पुरुषों में 1400 ग्राम तथा महिलाओं को 1300 ग्राम के लगभग पाया जाता है। मानव मस्तिष्क में सर्वाधिक मात्रा में जल पाया जाता है। मानव मस्तिष्क में सबसे कम पुनरुध्दभवन की क्षमता पाई जाती है। मानव मस्तिष्क को अध्ययन की दृष्टि से तीन भागों में बांटा गया है।
(¡) अग्र मस्तिष्क  (¡¡) मध्य मस्तिष्क (¡¡¡) पश्य मस्तिष्क

(¡) अग्र मस्तिष्क :- अग्र मस्तिष्क मानव मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है। यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा 2 तिहाई भाग लिए हुए होता है। अग्र मस्तिष्क का सबसे महत्वपूर्ण भाग सेरीब्रम है। सेरीब्रम में ज्ञानेन्द्रियों से प्राप्त उद्दीजनों को ग्रहण किया जाता है जिससे जानकारियां होती है। मानव की ताजा स्मृति (याददाश्त) सेरीब्रम में होती है। मानव मस्तिष्क के सेरीब्रम भाग में अधिकांश क्रिया जैसे- चलना, बोलना, बात करना, याद रखना, पढ़ना-लिखना आदि है। सेरीब्रम भाग मानव मस्तिष्क की इच्छा शक्तियों का केंद्र है अर्थात क्रिया को नियंत्रण रखने का कार्य सेरीब्रम करता है। सेरीब्रम मानव में जानकारियों का संग्रह करता है।

थैलेमस :- मस्तिष्क के थैलेमस भाग में हमें ठंडे व गर्म का एहसास होता है।

हाइकोथैलेमस :- मस्तिष्क के हाइकोथैलेमस भाग में विश्लेषण किया जाता है। हाइकोथैलेमस भाग शरीर के तापमान का नियंत्रण रखता है। जिस कारण हाइपोथैलेमस भाग को थर्मोस्टेट कहा जाता है। मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस भाग में भूख और प्यास पर नियंत्रण रखा जाता है। मस्तिष्क के इस भाग में भावनात्मक विचार जैसे- गुस्सा,  नफरत, ग्रहण, लगाव, ईर्ष्या आदि का उद्भव होता है।

(¡¡) मध्य मस्तिष्क :- मध्य मस्तिष्क का दूसरा नाम अनु मस्तिष्क है जो मानव शरीर का संतुलन बनाए रखने में सहायक है। मदमस्त एक मानव शरीर की दो महत्वपूर्ण ज्ञानेंद्रियों आंख व कान पर नियंत्रण रखने का कार्य करता है। आंख एवं कान मानव शरीर का संतुलन बनाते हैं। मानव देखकर व सुनकर संतुलन बनाता है। मानव नेत्र और कान पर ध्वनि व प्रतिबिंब 1/10 सेकेंड तक रहता है।

सेरीबेलम :- सेरीबेलम मध्य व पश्य भाग का महत्वपूर्ण भाग हैं। वे पश्य गिना जाता है। शराब पीने से व्यक्ति का सेरीबेलम वाला भाग प्रभावित होता है जिससे व्यक्ति के मस्तिष्क का संतुलन खराब हो जाता है।

(¡¡¡) पश्य मस्तिष्क :- पश्य मस्तिष्क, मस्तिष्क का वह भाग है जहां से शरीर की अनेएच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण किया जाता है।
जैसे- हृदय का धड़कना, आहार नाल की गति, पलक झपकना, एवं श्वसन आदि।

2. केंद्रीय तांत्रिका तंत्र


तंत्रिका तंत्र का वह भाग जो संपूर्ण शरीर के साथ स्वयं तंत्रिका पर नियंत्रण रखता है केंद्रीय तंत्रिका तंत्र कहलाता है। मस्तिष्क और मेरुरज्जु दोनों मिलकर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते हैं। मेरुरज्जु का बढ़ा हुआ भाग मस्तिष्क है।

3. मेरुरज्जु


मेडुला औब्लागेटा का पिछला भाग मेरुरज्जु ही बनाता है। मेरुरज्जु के चारों ओर पायमेटर, ड्यूरमेटर और अॉक्रायड का आवरण पाया जाता है। मेरुरज्जु का पिछला शिरा पतले सूत्र के रूप में होता है। मेरुरज्जु बेलनाकार खोखली तथा प्रतिपृष्ठ पर चपटी होती है। मेरुरज्जु के बीच में एक सकरी नाल पाई जाती है जिसे केंद्रीय नाल कहते हैं। इस नाल में सेरीब्रोस्पाइनल द्रव्य भरा रहता है।

मानव जीवन का उद्देश्य क्या है

आज के इस संसार में हर कोई व्यक्ति पैसे कमाने के पीछे भाग रहा है। एक-दूसरे व्यक्ति को पीछे छोड़ना ही जिंदगी बन गई है। हर कोई व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिंदगी की दौड़ में शामिल है।

संसार में हर कोई व्यक्ति द्वेष व ईर्ष्या की भावना से अपनी ज़िन्दगी को जीता हैं। हर कोई इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि उसके पास अपने परिवार, मित्र, रिश्तेदार एवं पत्नी- पुत्र से बात करने के लिए भी समय नहीं है, ईश्वर को जानना तो दूर की बात है। हर कोई इंसान पैसे कमाने के लालच में अपने लक्ष्य एवं ईश्वर ज्ञान के मार्ग को भूल चुके हैं।
आज के इंसान ने परमात्मा को भी कई रूप में बांट दिया है और अपने-अपने ईश्वर को श्रेष्ठ बताने में लगे।

मानव जीवन का उद्देश्य क्या है आइयें जानतें है  - Simple Health Meter
Manav Jeevan Ka Uddeshy

क्या यही हमारा जीवन है कि हमें जन्म से लेकर मृत्यु तक संघर्ष करना और द्वेष भावना से जीना चाहिए। क्या यही है हमारे जीवन का अर्थ एवं उद्देश्य है?
बार-बार जन्म लेने से व बार-बार मरने से छुटकारा पाना, यही मानव जीवन का परम उद्देश्य हैं। मतलब- ‘मोक्ष प्राप्त करना’।
मानव जीवन ईश्वर का वरदान है और इस जीवन में थोड़ा बहुत ईश्वर को जानना जरूरी है। हमारा जीवन तभी सफल होगा जब हम किसी व्यक्ति के काम आए।
हमें ईश्वर ने इस लायक बनाया है कि हम ईश्वर के ज्ञान को प्राप्त कर सके, तीर्थों में आ जा सके। इसके बावजूद हम अपना कल्याण नहीं कर सके तो हमसे बड़ा पापी इस दुनिया में कोई नहीं है।
लोगों को हमेशा एक-दूसरे व्यक्ति से शिकायत रहती है कि उस व्यक्ति ने मेरा बुरा कर दिया है, उस व्यक्ति ने मुझे भारी नुकसान दे दिया है लेकिन दुनिया ने आपको जितने भी नुकसान दिए हैं वह भरे जा सकते हैं परन्तु आप जो स्वयं का नुकसान कर रहे वह कभी भरा नहीं जा सकता।
व्यक्ति जितना अपने शरीर को स्वस्थ रखता है उतना ही अपने मन या आत्मा को स्वच्छ रखना चाहिए।
लाखों रुपए व्यक्ति अपने कपड़े, घर एवं शरीर पर लगा देता है क्या कभी सच्चे मन से ईश्वर के चरणों में दान किया है।
व्यक्ति को अपने जीवन में सुखी रहने के लिए शरीर के लिए खाने के लिए दो वक्त की रोटी एवं एक मकान सबसे छोटी आवश्यकता है और जिन लोगों को यह भी नसीब में नहीं होता है उन लोगों की मदद करना आपके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य की बात है। तभी आप अपने जीवन में सफल हो सकते हैं।
अगर आज हमारे इस संसार में हमारी बहन-बेटियां असुरक्षित है तो इसमें सबसे बड़ा हाथ इस फिल्मी दुनिया का हैं। ये लोग ऐसी-ऐसी फिल्में दिखाते हैं कि ना कुछ बालक भी उत्तेजित हो उठते हैं। दुर्भाग्य से यह बात जो करता है लोगों द्वारा उसका ही पुंतला फूंक दिया जाता हैं ऐसी है हमारी यह दुनिया।
व्यक्ति का दृष्टिकोण देखने व सुनने से ही बनता है जब गंदा देखेंगे तो अच्छा बनेंगे कैसे और गंदा सुनेंगे तो अच्छा बोलेंगे कैसे।
कभी आपने सोचा है कि आपके जीवन का उद्देश्य क्या है? व्यक्ति का उद्देश्य पैसे कमाना और अच्छे घरों में रहना ही नहीं है इसका उद्देश्य मनुष्य और परमात्मा के बीच एक संबंध होना एवं ईश्वर को जानना हैं।
अगर आपको अपने जीवन में बदलाव लाना है तो आपको ईश्वर के ज्ञान को पहचानना है और इसके लिए सबसे पहले अच्छा इंसान बनना जरूरी है। मनुष्य को द्वेष, ईर्ष्या आदि को छोड़कर सही मार्ग पर ईश्वर को जानना ही सबसे जरूरी है यही हमारे जीवन का अर्थ एवं उद्देश्य है।

गूगल सर्च कंसोल में वेबसाइट कैसे add करें in hindi में

किसी भी ब्लॉग या वेबसाइट को गूगल सर्च कंसोल या गूगल में कैसे जोड़े ताकि हमारी साइट पर अधिक Visitors आए। google विश्व का सबसे बड़ा सर्च इंजन है। google search console.

दोस्तों गूगल विश्व का सबसे बड़ा सर्च इंजन है। यह अपने दर्शकों को महत्वपूर्ण एवं सरल जानकारी प्रदान करने में सबसे आगे है। जिसने भी वेबसाइट या ब्लॉग बनाई है वह चाहता है कि उसकी साइट गूगल पर दिखाई दे लेकिन वेबसाइट गूगल सर्च पर दिखाई नहीं देती है।
इसका सबसे बड़ा कारण होता है कि हमने हमारी वेबसाइट को गूगल के Search Console Tool या गूगल नहीं जोड़ा है। इसी वजह से हमारी वेबसाइट गूगल के सर्च में नहीं दिखाई देती हैं।

गूगल सर्च कंसोल में वेबसाइट कैसे add करें in hindi में
How to add Website In Google 

अगर आप अपनी वेबसाइट या ब्लॉग को गूगल में सर्च पर लाना चाहते हैं तो आपको अपनी साइट को गूगल में सबमिट करना होगा। उसके बाद ही गूगल आपकी वेबसाइट या ब्लॉग को सर्च रिजल्ट में लाएगा।
इसके लिए आपको किसी तरह के खर्च की आवश्यकता नहीं है और यह प्रोसेस बहुत ही सीधा सा है तो दोस्तों आज के इस अध्याय में हम बताएंगे कि आप स्वयं ही ब्लॉग व वेबसाइट को गूगल सर्च कंसोल में कैसे जोड़ सकते हैं।

1. सबसे पहले आपको गूगल में जाना है और सर्च करना है Google Search Console । जैसे ही यह पेज खुलेगा पहले लिंक पर क्लिक करेंगे तो इस तरह का पेज खुलेगा जिस पर Start Now लिखा हुआ उस पर हम को क्लिक करना है।

Google Search Console

2. फिर इस तरह का पेज ओपन होगा और Add Property पर क्लिक करना होगा और अपने ब्लॉग या वेबसाइट यूआरएल को कॉपी कर पेस्ट कर देना है और नीचे Continue पर क्लिक करना है। यहां पर अपनी वेबसाइट Auto Verified हो जाएगी।

3. फिर आपको गूगल के साइड के डेशबोर्ड पर Sitemap पर जाना है और अपनी वेबसाइट का एक नया साइट मैप यूआरल जोड़ना होगा जो इस तरह का होगा। और फिर सबमिट बटन पर क्लिक करे।

4. आपको गूगल सर्च कंसोल में डैशबोर्ड पर Url Inspection पर जाना है और अपनी साइट में लिखी गई पोस्ट के यूआरएल को कॉपी कर पेस्ट करना है जो थोड़ी देर में गूगल से इंडेक्स कर जानकारी लेगा तो यह पेज कुछ इस तरह से ओपन होगा।

6. यहां पर हम Request Indexing पर क्लिक कर  हमारी पोस्ट के यूआरएल को गूगल के पास इंडेक्सिंग के लिए भेज देंगे। इसके बाद गूगल आपकी वेबसाइट या ब्लॉग एवं पोस्ट के यूआरएल को अपने डाटा के अंदर संग्रहित कर लेगा। और जैसे ही कोई व्यक्ति आपकी साइट पोस्ट से संबंधित जानकारी गूगल से प्राप्त करना चाहेगा तो गूगल आप की पोस्ट को सर्च में दे देगा।
इस तरह से आप अपनी वेबसाइट या ब्लॉग को सर्च रैंक में ला सकते हैं।
अगर आपको वेबसाइट से संबंधित किसी प्रकार की परेशानी आती है तो आप हमें कॉमेंट या Contact Us पेज फॉर्म का उपयोग करके सहायता ले सकते हैं।
आपको यह पोस्ट लाभदायक एवं अच्छी लगी हैं तो हमें फॉलो एवं कमेंट जरूर करें।