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हृदय परिसंचरण तंत्र – क्या है, कैसे कार्य करता है सम्पूर्ण जानकारी हिन्दी में

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हृदय परिसंचरण तंत्र का अर्थ होता है रक्त का संपूर्ण शरीर में परिक्रमण। हृदय एक पेशिय अंग होता है। मानव हृदय 1 मिनट में 72 बार धड़कता है। यह शंकु आकार की होता है।

आपकोे इस अध्याय में हृदय परिसंचरण तंत्र क्या है, यह कैसे कार्य करता है, शिराएं एवं धमनियों के बारे में और मानव हृदय से संबंधित सारी महत्वपूर्ण जानकारी आपको पढ़ने के लिए मिलेगी।

हृदय परिसंचरण तंत्र - क्या है, कैसे कार्य करता है सम्पूर्ण जानकारी हिन्दी में
Human Heart Diagram 

हृदय परिसंचरण तंत्र का अर्थ होता है रक्त का संपूर्ण शरीर में परिक्रमण। हृदय एक पेशिय अंग होता है। यह मानव शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। मानव हृदय की आकृति शंकु आकार की होती है। मानव हृदय 1 मिनट में 72 बार धड़कता है।

हृदय परिसंचरण तंत्र के खोजकर्ता विलियम हार्वे है। परिसंचरण तंत्र दो प्रकार का होता है।
(¡) खुला परिसंचरण तंत्र
(¡¡) बंद परिसंचरण तंत्र

(¡) खुला परिसंचरण तंत्र – ऐसा परिसंचरण तंत्र जिसमें रक्त परिवहन के लिए धमनी और शिराएं नहीं पाई जाती है अर्थात नलिकाएं नहीं होती है उसे खुला परिसंचरण तंत्र कहते हैं।
• ऐसा परिसंचरण तंत्र आर्थोफोडा संघ के जीवो के जैसे- कॉकरोच, बिच्छु आदि में पाया जाता है।


(¡¡) बंद परिसंचरण तंत्र – ऐसा परिसंचरण तंत्र जिसमें रक्त परिवहन के लिए धमनी व शिराएं पाई जाती है अर्थात नालीकाएं होती है, वह बंद परिसंचरण तंत्र कहलाता है।
जैसे- मानव, बिल्ली, कुत्ता और कछुआ आदि।

मानव हृदय :- हृदय मनुष्य के शरीर का सबसे व्यस्त अंग है। मानव हृदय का भार पुरुषों में 300 व महिलाओं में 250 ग्राम के लगभग पाया जाता है। मानव हृदय करण हल्का गुलाबी होता है। मानव ह्रदय की आकृति शंकु आकार की होती है और इसका अध्ययन कार्डियोलॉजी विज्ञान में किया जाता है।
मानव हृदय की सुरक्षा कवच का नाम पैराकार्डियल झिल्ली है भरे द्रव का नाम पैराकार्डियल द्रव है। मानव का समान 4 कोष्ठीय एविज वर्ग के प्राणियों में या पक्षियों में पाया जाता है।
सर्वाधिक हृदय कोकरोच में 13 को कोष्ठीय पाया जाता है एवं बंदर में 3 कोष्ठीय हृदय पाया जाता है। मेंढक में तीन कोष्ठीय हृदय पाया जाता है जबकि केंचुआ में आठ कोष्ठीय हृदय पाया जाता है।
मानव हृदय के बाएं भाग में शुद्ध रक्त बहता है एवं दाएं भाग में अशुद्ध रक्त बहता है। हृदय से शरीर को अंगो तक रक्त पहुंचाने का कार्य धमनियां करती है।
धनिया व्यास में सकड़ी होती है। रक्तदाब सदैव धनिया का मापा जाता है जिसे मापने का कार्य स्फेगेनोमीटर करता है।
एक सामान्य व्यक्ति का रक्त दाब 120/080 mmH2 होता है। 120 से ऊपर रक्तदाब जाने पर व्यक्ति को हाइपरटेंशन रोग हो जाता है व 80 से नीचे आने पर व्यक्ति को हाइपोटेंशन नामक रोग हो जाता है।
रक्त दाब मापने का कार्य सर्वप्रथम स्टीफन हेल्स नाम वैज्ञानिक ने किया जिनके द्वारा सर्वप्रथम घोड़े का रक्तदाब मापा गया था।
मानव हृदय की आवाज सुनने के लिए डॉक्टर के द्वारा स्टैथोस्कोप नामक यंत्र का उपयोग किया जाता है और मानव हृदय की धड़कन देखने के लिए ECG (इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राफी) नामक यंत्र का प्रयोग किया जाता है। मानव हृदय की धड़कनों को कृत्रिम रूप से नियंत्रण करने का कार्य पेसमेकर करता है।
मानव हृदय की धड़कन दो चरणों में पूर्ण होती है ।
(¡) सिस्ट्रोल + डाइस्ट्रोल = हार्टबीट
(¡¡) लब + डब = धड़कन

मानव धड़कन को लगा समय 0.8 सेकंड होता है जिस दौरान लगभग 70 ml लीटर रक्त शरीर के अंगों तक पंप कर दिया जाता है।
मानव हृदय 1 मिनट में 72 बार धड़कता है जिस दौरान लगभग 4 से 5 लीटर रक्त शरीर के अंगों तक पंप कर दिया जाता है और मानव हृदय से शरीर के अंगों तक रक्त ले जाने का कार्य धमनियाँ करती है व वापस लाने का कार्य शिराएं करती है।

मानव हृदय से शरीर के अंगों तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में उनके नाम-
मस्तिष्क       —————-     केरोटिड धमनी
ॠजू            —————-     सबक्लेवियन धमनी
कलाई         —————-      व्रेकियल धमनी
अमाशय       —————-        गॉस्टिक धमनी
यकृत          —————-        हैप्पेटिक धमनी
वृक्क          —————-         रीनल धमनी
फेफड़ों        —————-         प्लमोनरे धमनी
हृदय पेशीयां    —————-      कोरेनरी धमनी

कोरेनरी धमनी अवरुद्ध हो जाने पर अल्जाइम नामक रोग हो जाता है। इस रोग में रोगी के सीने में दर्द रहता है व चुभन सी बनी रहती है।
मानव शरीर की सभी धमनियों में ऑक्सीजनित रक्त बहता है सिर्फ फेफड़ों को जाने वाली प्लमोनरे धमनी को छोड़कर क्योंकि यह धमनी फेफड़ों को रक्त पहुंचाती है व रक्त में ऑक्सीजन मिलने का कार्य फेफड़ों में होता है।
मानव शरीर की सभी शिराओं में कार्बन डाइऑक्साइड रक्त बहता है सिर्फ प्लमोनरे शिरा को छोड़कर।
मानव शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाने पर हृदय घात का खतरा रहता है और मानव धमनियों का रंग गहरा लाल होता है। ये शरीर की आंतरिक गहराइयों में होती है।

धन्यवाद

ध्वनि क्या है, यह कितने प्रकार के होती है और कैसे उत्पन्न होती हैं

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ध्वनि ऊर्जा का वह रूप होती है जिसे मानव के कानों द्वारा सुना जा सकता है। इन ध्वनि तरंगों को हम बोलकर या किसी वस्तु को धकेलकर व रगड़कर उत्पन्न कर सकते हैं। 

ध्वनि क्या है, यह कितने प्रकार की होती है और इसकी अधिकतम गति कहां तक होती है एवं यह कैसे उत्पन्न होती है। आपको इस पोस्ट में इन सारी चीजों के बारे में जानकारी पढ़ने को मिलेगी।

1. ध्वनि क्या है, यह उत्पन्न कैसे होते हैं

ध्वनी वह यांत्रिक तरंग ऊर्जा है, जिसे मनुष्य के कानो द्वारा सुना जा सके ध्वनि कहलाती हैं।
ध्वनि का सर्वाधिक बैग स्टील या इस्पात में होता है। वायु में ध्वनि का वेग 332 मीटर प्रति सेकंड होता है और निर्वात में ध्वनि का वेग शुन्य होता है।
यही कारण है कि अंतरिक्ष में बात करना कठिन होता है अतः बात करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।

ध्वनि क्या है, यह कितने प्रकार के होती है और कैसे उत्पन्न होती हैं
dhwani ke prakar or utpann kaise hoti h


आवर्ती परिसर के आधार पर ध्वनि तरंगे तीन प्रकार की होती है :-
(¡) श्रव्य ध्वनि तरंग
(¡¡) अवश्रव्य ध्वनि तरंग
(¡¡¡) पराश्रव्य ध्वनि तरंग

(¡) श्रव्य ध्वनि तरंग :- वे तरंगे जिनकी आवर्ती 20 Hz से लेकर 20000Hz होती है श्रव्य ध्वनि तरंग कहलाती हैं।
• इन ध्वनि तरंगों को मनुष्य के कानों द्वारा आसानी से सुना जा सकता है।

(¡¡) अवश्रव्य ध्वनि तरंग :- वे तरंगे जिनकी आवर्ती 20Hz से कम होती है अवश्रव्य ध्वनि तरंग कहलाती है।
• इन ध्वनि तरंगों को मनुष्य के कानों द्वारा नहीं सुना जा सकता है।
जैसे :- हृदय की धड़कन, भूकंपीय तरंग

(¡¡¡) पराश्रव्य ध्वनि तरंग :- इन ध्वनि तरंगों की आवृत्ति 20000Hz से अधिक होती है।
• इन ध्वनि तरंगों को कुत्ता, बिल्ली, चमगादड़ और डॉल्फिन आदि जीवों द्वारा आसानी से सुना जा सकता है।
• इलेक्ट्रोकार्डियो ग्राफी (ECG), अल्ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) एवं सोनार यंत्र में पराश्रव्य ध्वनि तरंगों का उपयोग किया जाता है।
• सोनार का पूरा नाम है – साउंड नेवीगेशन एंड रैगिंग।

2. ध्वनी के गुण

(¡) तीव्रता :- ध्वनि का ऐसा गुण जिसमें उसके तीव्र एवं मंद होने का पता चलता है, तीव्रता कहलाती है।
• ध्वनि की तीव्रता को Decibel में मापा जाता है।
• जिनकी तीव्रता अधिक होती है वे ध्वनि तरंग तेज सुनाई देती है जबकि जिनकी तीव्रता कम होती है वे ध्वनि धीमी सुनाई देती है।
जैसे- मच्छर के भिनभिनाहट की अपेक्षा शेर की दहाड़ ने की आवाज का तेज सुनाई देना।

(¡¡) तारत्व :- ध्वनि का ऐसा गुण जिसमें उसके मोटी एवं पतले होने का पता चलता है तारत्व कहलाती है।
जैसे- पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं की आवाज का पतली सुनाई देना। क्योंकि महिलाओं की आवाज में तारत्व अधिक होता है।

(¡¡¡) गुणत्ता :- ध्वनि का ऐसा गुण जिसमें समान तीव्रता एवं तारत्व की ध्वनि तरंग में अंतर स्पष्ट किया जा सकता है तो इसे गुणत्ता कहते हैं।
जैसे- बाहर खड़े व्यक्ति को बिना देखे उसकी आवाज से पहचान लेना।

3. ध्वनि की घटनाएं

(¡) ध्वनि का विवर्तन :- ध्वनि तरंग का किसी अवरोध किनारे से मुड़कर सुनाई देना की घटना ध्वनि का विवर्तन कहलाती हैं।
• ध्वनि का विवर्तन प्रकाश से अधिक होता है।
जैसे- बंद कमरे में टीवी चलाने पर चित्रों के अपेक्षा ध्वनि का पहले सुनाई देना।

(¡¡) प्रतिध्वनी :- ध्वनि तरंग का किसी परावर्तक पृष्ठ से टकराकर बार-बार सुनाई देने की घटना प्रतिध्वनी कहलाती है।
• प्रतिध्वनि सुनने के लिए श्रोता व परावर्तक पृष्ठ की बीच की दूरी न्यूनतम 16.4 मीटर या 17 मीटर होनी चाहिए।
• परावर्तक पृष्ठ जितना बड़ा होगा प्रतिध्वनी उतनी ही स्पष्ट सुनाई देगी।

(¡¡¡) अनुरणन :- किसी ध्वनि स्रोत के बंद होने के कुछ समय बाद ध्वनि का सुनाई देने की घटना ही अनुरणन कहलाती है।
जैसे- बादलों के गरजने की आवाज का सुनाई देना, दूर चले पटाखे की आवाज का सुनाई देना।

4. अनुनाद

यदि बाह्य बल की आवर्ती स्वाभाविक आवर्ती के बराबर या अधिक कर दी जाए तो दोलनो का आयाम अधिक बढ़ जाता है जिसे अनुनाद कहा जाता है।
जैसे- • बंद कमरे में लाउडस्पीकर चलाने पर बर्तनों का नीचे गिरना।
• 1839 में अमेरिका का टोकोमो पुल अनुनाद के कारण क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसी कारण पुल पार करते समय सैनिकों को कदम ताल मिलाकर नहीं चलने की सलाह दी जाती है।

5. डॉप्लर प्रभाव

 

जब ध्वनि स्रोत एवं श्रोता के मध्य आपेक्षिक गति होती है तो मूल ध्वनि से पृथक ध्वनि सुनाई देती है, जिसे डॉप्लर प्रभाव कहा जाता है।
डॉप्लर प्रभाव जॉन डॉप्लर द्वारा प्रति पारित किया गया था।
जैसे- • अपनी ओर आती हुई रेलगाड़ी की सीटी की आवाज।
• वायुयान की दूरी एवं आकाशीय पिंडों का वैग का निर्धारण डॉप्लर प्रभाव पर आधारित है।

टीबी : इसके लक्षण, कारण एवं इलाज जानिए क्या है -Simple Health

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क्षय रोग यह एक संक्रामक रोग है जो बैक्टीरिया के कारण होता है। टीबी ज्यादातर फेफड़ों में होता है लेकिन ठीक समय पर इलाज न हो तो यह शरीर के अन्य अंगों को ग्रसित कर देता है। 

टीबी बैक्टीरिया से होने वाला एक संक्रामक रोग है। टीबी (क्षय रोग) मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है लेकिन ठीक समय पर इसका इलाज ना हो तो यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। जैसे – आंते, गुर्दे, मस्तिक, जोड़ों, हड्डियां, हृदय एवं त्वचा भी टीबी से ग्रसित हो सकते हैं। यह रोग हवा के जरिए फैलता है।

टीबी : इसके लक्षण, कारण एवं इलाज जानिए क्या है -Simple Health
Tuberculosis Treatment and Tricks Of TB Preventions

इस रोग का इन्फेक्शन खांसने व छींकने पर निकलने वाली बारीक बूंदों से फैलता है। जब टीबी बैक्टीरिया सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है तो वह कई गुना बढ़ जाता है और फेफड़ों को प्रभावित करता है। हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इसके बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद करती है लेकिन जैसे-जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती हैं तो टीबी के संक्रमण की आशंका बढ़ती जाती है।

टीवी की तीन अवस्थाएं होती है –
(¡) पसलियों में दर्द पूरे
(¡¡) शरीर में हल्की सी टूटन और लगातार बुखार
(¡¡¡) हाथ पांव में अकड़न

टीबी होने के लक्षण :- 

• दो सप्ताह से लगातार खांसी का होना।
• खांसी के साथ बलगम और कभी-कभी खून का आना।
• मौसम चाहे कितना ठंडा ही क्यों ना हो मरीज को पसीना आना।
• रोगी को लगातार बुखार का आना।
• स्वादिष्ट भोजन खाने पर भी लगातार वजन का घटना।
• सांस लेते समय सीने में दर्द और सीने का उखड़ना।
• कम काम करने पर भी अधिक थकावट महसूस करना।

टीबी होने के कारण :- 

यह रोग ट्यूबरल नामक कीटाणुओं के कारण होता है। ये कीटाणु व्यक्ति के फेफड़ों आदि में उत्पन्न होकर उसे नष्ट कर देते हैं। क्षय रोग उन व्यक्तियों में ज्यादा होता है जिनका खाने एवं रहने का तरीका सही ना हो। इन खराब आदतों के कारण हमारे शरीर में दूषित द्रव्य जमा हो जाता है जिसके कारण शरीर में रोग उत्पन्न होने लगते हैं।
इस का मुख्य कारण हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना है। क्षय रोग तब होता है जब व्यक्ति कार्य करने की क्षमता से अधिक कार्य करता है। धूल से भरे एवं गिले स्थान पर रहने से भी टीबी रोग हो जाता। कई प्रकार की नशीली दवाइयों का सेवन लंबे समय तक करने के कारण भी टीबी रोग हो जाता है। भोजन से संबंधित खानपान में अनुचित ढंग से प्रयोग करने पर भी यह रोग हो जाता है।

बचाव कैसे करें :-

इस रोग से ग्रसित व्यक्ति से दूरी बनाए रखें। टीबी रोगी के कपड़े, बिस्तर और उसके द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं को न छुएं। हुए खांसते व छींकते समय मुंह पर मास्क लगाना चाहिए। इस रोगी को खुले में थूकना नहीं चाहिए हमेशा डस्टबिन में ही थूकें। मरीज भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचे। टीबी के रोगी को अच्छी रोशनी व हवादार कमरों में रहना चाहिए।

टीबी का प्राकृतिक उपचार :-

1. इस रोग का 95 फीसदी तक कामयाब इलाज है। शरीर के जिस हिस्से में टीबी है उसके मुताबिक जांच होती है। फेफड़ों की टीबी के लिए बलगम की जांच होती है।
2. टीबी का उपचार करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है।
3. क्षय रोग से पीड़ित व्यक्ति को अधिक संख्या में फल व सलाद का सेवन करना चाहिए।
4. क्षय रोग से ग्रसित व्यक्ति को नारियल का पानी पीना चाहिए जिससे इस रोग में आराम मिलता है।
5. टीबी को ठीक करने के लिए रोगी व्यक्ति को नीम की पत्तियों के पानी का एनिमा लेकर पेट को साफ करना चाहिए।
6. सुबह के समय रोगी को सूर्य के प्रकाश से शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।
7. इस रोग के व्यक्ति को व्यायाम भी करने चाहिए।
8. टीबी से पीड़ित रोगी को शुद्ध एवं खुली हवा में टहलना चाहिए।
9. टीबी से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना बकरी का दूध पीना चाहिए क्योंकि बकरी के दूध में इस रोग के कीटाणुओं को नष्ट करने की शक्ति होती है।
10. लहसुन व प्याज की 8-10 बूंदों में एक चम्मच शहद मिलाकर रोजाना चाटने से रोगी को लाभ मिलेगा।
11. एक चम्मच शहद में मीठे आम का रस मिलाकर रोगी व्यक्ति को 1 माह सेवन करना चाहिए ऐसा करने से टीबी रोग जल्दी ठीक हो जाता है।
12. रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन सुबह के समय हरी घास पर नंगे पैर टहलना चाहिए।
13. टीवी रोग को ठीक करने के लिए अनार, अमरुद, खजूर, बादाम, नींबू पानी, लहसुन, प्याज और हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

धन्यवाद

Coronavirus सुखद खबर :- आखिर मिल ही गया कोरोना वायरस का इलाज

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विश्वभर में कोरोना वायरस से लोगों में खौफ फैला हुआ है इसी बीच केरल में इस वायरस से संक्रमित तीन लोगों का इलाज सामान्य बुखार में दी जाने वाली पेरासिटामॉल से किया गया।

विश्व भर में कोरोना वायरस का खौफ चल रहा है। भारत में भी इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है लेकिन केरल में इस वायरस से संक्रमित तीन लोगों का इलाज सामान्य बुखार में दी जाने वाली पेरासिटामॉल से किया गया। केरल राज्य के सरकारी चिकित्सकों ने कड़ी मेहनत एवं आम दवाओं के जरिए कोरोना वायरस के तीन मरीजों को पूरी तरह स्वस्थ किया।
इस वायरस से संक्रमित तीनों छात्र चीन देश के महान शहर से आए थे यह छात्र केरल के कासरगोड, त्रिशूल और अलाप्पूझा के निवास थे। इनका इलाज वहां के ही जिला चिकित्सालय में किया गया। जहां इस वायरस से ग्रसित लोगों के लिए विशेष वार्ड बनाए थे।
इन तीनों पॉजिटिव छात्रों में कोरोना वायरस के हल्के लक्षण दिखाई दिए थे इसलिए इनका इलाज सामान्य बुखार में दी जाने वाली पेरासिटामोल एवं अन्य सामान्य दवाएं शामिल थी।

Coronavirus सुखद खबर :- आखिर मिल ही गया कोरोना वायरस का इलाज
Perasitamoll tables use in coronavirus 


कोरोना वायरस से भारत में अब तक 28 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो गई है। इनमें 15 विदेशी पर्यटक भी शामिल है। जिनमें से तीन लोगों को पूरी तरह स्वस्थ कर दिया गया। राजस्थान के जयपुर शहर में भी विदेशी मरीज में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस का आतंक फैला हुआ है। कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें चीन में हुई है। यह वायरस अब तक 60 से अधिक देशों में फैल चुका है।
दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पर रिसर्च कर रहे हैं लेकिन अब तक अच्छे परिणाम सामने नहीं आये हैं।
कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन विकसित करने पर काम चल रहा है। चाहे अभी इस वायरस का संपूर्ण तरीके से इलाज नहीं ढूंढा जा सका हो लेकिन विश्व भर के मेडिकल वैज्ञानिक इस वायरस के बारे में बहुत कुछ जान चुके हैं।
इन वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना वायरस निर्जीव सतह पर एक हफ्ते तक जिंदा रह सकता है और कॉपर तथा स्टील पर दो घंटे जीवित रहता है जबकि प्लास्टिक एवं कार्ड बोर्ड पर लंबे समय तक यह वायरस जीवित रह सकता है।
कोरोना वायरस इंसान के शरीर के बाद कुल 9 दिनों तक जीवित रह सकता है। इस वायरस के संक्रमण का सबसे अधिक खतरा संक्रमित व्यक्ति से सीधे संपर्क में आने पर ही है।
विश्व बैंक ने कोरोना वायरस से प्रभावित देशों के लिए फंड भी जारी किया है। विश्व बैंक वायरस से प्रभावित देशों को 12 बिलियन डॉलर का फंड देगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस से बचने के लिए एल्कोहल से लगातार हाथ धोने की सलाह दी है ना कि इसे पीने की।

चीन में फैले कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में खौफ मे है, लोग काफी डरे हुए लेकिन आज हम आपको बता रहे कैसे कोरोना वायरस से बचा जा सकता है –
1. बाजार से लाए दे फल सब्जियों को अच्छी तरह से धोकर ही खाएं।
2. खाना अच्छी तरह से पका है और खाना बनाने वाले पानी को भी उबालकर काम मिले।
3. अंडे में मीट को कच्चा नहीं खाए इन्हें अच्छे से उबालकर और पका कर खाएं।
4. बार-बार नाक, मुहं और आंखों पर हाथ ना  लगाए अगर ऐसा करते हैं तो तुरंत अपने हाथ अच्छे से धोएं।
5. भारत से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
6. विदेशी वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस मोबाइल की स्क्रीन पर भी पाया जा सकता है इसलिए मोबाइल का उपयोग करने के तुरंत बाद अपने हाथ धोएं।
इन तीन तरीकों से आप और उन वायरस से बच सकते हैं।

How to get fair skin naturally at home fast – गोरा होने के उपाय

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हमारी भागदौड़ की जिंदगी में प्रदूषण एवं धूल चेहरे की निखार को छीन लेती है खासतौर पर गोरे रंग का चेहरा होना महिलाओं के लिए सौंदर्य का प्रमुख कारण होता है। आइयें कुछ जानें 

हमारे जीवन की इस भाग दौड़ की जिंदगी में प्रदूषण और धुल हमारे चेहरे के निखार को छीन लेते हैं। इसके लिए लोग बाजार में मिल रही महंगी क्रीम का उपयोग करते हैं जो फायदा देने के साथ-साथ नुकसान भी करती है।
गोरे रंग का चेहरा होना महिलाओं के लिए सौंदर्य प्रमुख लक्षण होता है। आपके चेहरे का निखार ही आपकी सुंदरता की सच्चाई बताता है।
यह महिलाओं के जीवन के लिए अति उपयोगी होता है।

How to get fair skin naturally at home fast - गोरा होने के उपाय
गोरा होने के घरेलू उपाय 

अक्सर महिला इस सोचती है कि हमारी क्रीम में विटामिन सी व ई मौजूद है तो हमे संतुष्ट एवं पौष्टिक आहार लेने की आवश्यकता नहीं है लेकिन यह धारणा बिल्कुल गलत है। जबकि विटामिनों से भरपूर सब्जियां व फल खाए तो आपकी त्वचा पर एकदम निखार आ जाएगा अगर आप विटामिन से भरपूर फल एवं सब्जियों का उपयोग करेंगे तो आपके चेहरे पर पड़ने वाली सूर्य की किरणों से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और इनका सेवन करने से चेहरे पर दाग-धब्बे, मुहांसे एवं झुर्रियां नहीं होंगे।
यहां पर हमने कुछ घरेलू टिप्स निम्न प्रकार से दिए हैं जिनका आप उपयोग करके अपने चेहरे को गोरा कर सकते हैं। यह घर नुक्खे स्त्री और पुरुष दोनों के लिए ही है।

गोरा होने के घरेलू टिप्स :-

1. नींबू के रस को शहद और दूध पाउडर के साथ मिलाकर पेस्ट बनाएं लेकिन पेस्ट गाढ़ा होना चाहिए। ऐसे चेहरे पर 10 मिनट तक प्रतिदिन लगाए इससे आपके चेहरे की त्वचा पर प्राकृतिक निखार आ जाएगा।
2. हल्दी के पाउडर को टमाटर के रस के साथ मिलाए और चेहरे पर लगाए कुछ समय बाद चेहरे को धोलें। ऐसा करने पर आपका चेहरा गोरा होने लगेगा।
3.  थोड़ा सा शहद ले और इसका लेप चेहरे पर करें। जब लेप चिपचिपा हो जाए तो उंगलियों से चेहरे की मसाज करें। पूरी तरीके से शहद सूख जाने पर थोड़े से गर्म पानी से मुंह धो ले। ऐसा प्रतिदिन करने से आपकी त्वचा के रूखेपन में छुटकारा मिलेगा।
4. नारियल तेल में प्रोटीन, कैप्रियलिक अम्ल, विटामिन ई और वसा होता है। इसे अपने आंख से नीचे काले घेरे पर लगाने से इस समस्या से समाधान पा सकते हैं। इस नारियल के तेल से समस्त प्रकार की त्वचा से संबंधित समस्याओं का उपचार कर सकते हैं।
5. गुलाब की पत्तियां, नीम की पत्तियां और गेंदे का फूल इन सभी को एक कटोरी पानी में उबालें तथा ठंडा होने पर चेहरे पर लगाए ऐसा रोजाना करने से त्वचा गोरी एवं मुहांसे निकलना बंद हो जाते हैं।
6. हल्के गुनगुने पानी में दो-तीन नींबू के रस को मिलाकर गर्मी में रोजाना नहाये इससे त्वचा में गोरापन आने लगेगा।
7. दो चम्मच शहद, दो चम्मच दही और थोड़ा सा नींबू का रस लें और इन सबका का पेस्ट बना ले। चेहरे पर यह पेस्ट 30 मिनट तक लगा रहने दे फिर साफ पानी से मुंह को धो ले। इसको एक सप्ताह में दो बार ही प्रयोग करें। ऐसा करने पर त्वचा में निखार व गोरापन आने लगेगा।
8. मुल्तानी मिट्टी एवं एलोवेरा जेल का मिश्रण करके लगाने से आपकी त्वचा पर निखार आएगा।
9. आंवले के मुरब्बे को दो-तीन महीनों तक लगातार खाने से आपकी त्वचा में बदलाव आने लगेगा।
10. गर्मी के दिनों में ज्यादा से ज्यादा पानी पिए और पेट को हमेशा साफ रखें।
11. भोजन करने के बाद थोड़ी सी सौंफ खाने से आपका खून साफ रहेगा और त्वचा पर भी निखार आएगा।
12. उबटन बनाने के लिए थोड़ा-सा दही, हल्दी, जौ व उसमें केसर मिलाले। इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाने से कुछ ही दिनों में त्वचा गोरी होने लगेगी।
13. अपनी त्वचा के अनुसार ही बाजार में मिल रही क्रीम का उपयोग करें।

धन्यवाद

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रक्त के प्रकार, मुख्य घटक व उनका महत्व क्या है जानते है

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रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। blood का लाल रंग हीमोग्लोबिन के कारण होता है। इस अध्याय में हम रक्त के प्रकार, मुख्य घटक एवं रक्त की संरचना तथा कार्य के बारे में अध्ययन करेगें।

रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है। रक्त की खोजकर्ता कार्ललैंड स्टीनर है। रक्त का लाल रंग हिमोग्लोबिन के कारण होता है। रक्त का निर्माण भ्रूण अवस्था में यकृत (प्लीहा) में व वयस्क अवस्था में अस्थि मज्जा में होता है। रक्त का अध्ययन हेमैेटोलॉजी विज्ञान में किया जाता है। रक्त की मात्रा शरीर के भाग का 7% होती है व आयतन में 5 से 6 लीटर होती है।
मानव शरीर का रुधिर बैंक प्लीहा / स्पीलन / तिल्ली होता है। रक्त का Ph मान 7.4 होता है जिस कारण रक्त का माध्यम हल्का क्षारीय व स्वाद हल्का तीखा होता है।

रक्त को अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में बांटा जा सकता है।
(¡) प्लाज्मा (55 से 60 प्रतिशत)
(¡¡) रूधिराणु (40 प्रतिशत)

रक्त के प्रकार, मुख्य घटक व उनका महत्व क्या है जानते है
रक्तदाता 

1. प्लाज्मा 

प्लाज्मा मानव रक्त में 55 से 60% होता है जिसमें जल की मात्रा 90%, प्रोटीन 7%, एवं ग्लूकोस 2% और अन्य तत्व 1% में पाए जाते हैं।
प्लाज्मा मानव रक्त में भोजन व हार्मोन संवहन के साथ-साथ रक्त का धक्का लगाने में भी सहायक होता है।
रक्त के प्लाज्मा भाग से प्रोटीन को निकाल दिया जाए तो बने हुए भाग को सिरप कहा जाता है।

2. रूधिराणु 

रूधिराणु रक्त का 40% लिए होता है। रूधीराणु को अध्ययन की दृष्टि से तीन भागों में बांटा गया है।

(¡) RBC (Red Bled Cell) :- RBC का निर्माण भूर्ण अवस्था में यकृत / पलिया में व वयस्क अवस्था में अस्थिमज्जा में होता है।
RBC में केंद्रक नहीं पाया जाता है। अपवाद स्वरूप ऊंट और लावा दो ऐसे स्तनधारी है जिनकी RBC में केंद्रक पाया जाता है।
RBC का कार्य हिमोग्लोबिन की सहायता से O2 एवं CO2 का परिवहन करना होता है।
RBC का जीवनकाल अधिकतम 120 दिन होता है।
RBC की संख्या ऊँचाई पर जाने पर बढ़ जाती है और सोते समय RBC की संख्या में 5% कमी हो जाती है।
RBC का कब्रिस्तान यकृत और प्लीहा को कहते हैं।

(¡¡) WBC (White Bled Cell) :- WBC का निर्माण अस्थिमज्जा में होता है एवं इसमें केंद्रक पाया जाता है। WBC का सबसे महत्वपूर्ण भाग केंद्र होता है। इसका अधिकांश भाग न्यूट्रॉफिल्स कणिकाओं का बना होता है जो रोगाणुओं को भक्षम करने में सहायक होती है।
WBC का जीवन काल लगभग 2 से 7 दिन तक का होता है। WBC मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का कार्य करते हैं। इसका मृत्यु स्थल रक्त होता है।
RBC व WBC का अनुपात 600 अनुपात 1 (600:1) होता है।

(¡¡¡) रुधिर विम्वाणु (प्लेटलेट्स) :-
प्लेटलेट्स मानव शरीर में रक्त का थक्का लगाने में सहायक है रक्त का थक्का लगाने में प्रोटीन, हिमोग्लोबिन, थोम्बिन, फाइब्रिनोजन, प्रोथोम्बिन, थर्मोप्लास्ट, विटामिन K व B2 सहायक होते हैं।
रूधिर विम्वाणु केंद्रक विहीन होता है। इसका जीवनकाल लगभग 1 से 4 दिन का होता है। प्लेटलेट्स एक सामान्य स्वस्थ मानव में दो लाख से चार लाख प्रति घन मिमी. होतीे हैं।
प्लेटलेट्स की संख्या कम होने पर व्यक्ति के रक्त का थक्का नहीं जमता जिससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

3. रक्त समूह एवं रक्तदान करने की स्थिति :- 

रक्त के प्रकार, मुख्य घटक व उनका महत्व क्या है जानते है
एन्टीजन एवं प्रतिरक्षी 

रक्तदान करने की स्थिति :-

रक्तदाता                                               रक्तग्राही
A                       ——–>                    A / AB
B                       ——–>                    B / AB
AB                    ——–>                       AB
O                      ——–>                   O, A,B,
                                               AB (सर्वदाता)

रक्तग्रहण करने की स्थिति :-

A                    <————–            A / O
B                    <————–            B / O
AB                  <————–          A, B, AB, O
O                    <————–            O

मानव रक्त में ग्लाइकोन प्रोटीन के कारण एंटीजन व एंटीबॉडी का निर्माण होता है। सर कार्ललैंड स्टीनर ने रक्त समूह की खोज करते समय प्रोटीन का ध्यान रखा और बताया कि सर्वाधिक एंटीबॉडी ‘O’ रक्त समूह में व सबसे कम एंटीबॉडी ‘AB’ रक्त समूह में पाई जाती है।
सर्वाधिक एंटीजन ‘AB’ रक्त समूह में होते हैं तथा सबसे कम एंटीजन ‘O’ रक्त समूह में होते हैं।
‘O’ रक्त समूह को सर्वदाता रक्त समूह कहते हैं क्योंकि ‘O’ रक्त समूह सभी को रक्त दे सकता है व इसमें समूह में सर्वाधिक एंटीबॉडी होते हैं।
‘AB’ रक्त समूह सर्वग्राही रक्त समूह कहलाता है क्योंकि ‘AB’ रक्त समूह सभी से रक्त ले सकता है और इस रक्त समूह में एंटीबॉडीज का अभाव होता है।
‘O’ रक्त समूह सिर्फ ‘O’ रक्त समूह वाले व्यक्ति से ही रक्त ले सकता है।
‘AB’ रक्त समूह सिर्फ ‘AB’ रक्त समूह वाले व्यक्ति को ही रक्त दे सकता है। मानव शरीर का रुधिर प्लीहा को कहा जाता है।

4. रक्तदान से संबंधित प्रमुख तथ्य :-

1. रक्तदान करने के लिए व्यक्ति को स्वस्थ होना चाहिए।
2. व्यक्ति में हीमोग्लोबिन की मात्रा 14-15 के मध्य होनी चाहिए।
3. महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12-14 के मध्य होनी चाहिए।
4. एक बार सिर्फ एक यूनिट रक्तदान करना चाहिए।
उसके बाद लगभग 3-6 महीनों का अंतराल होना चाहिए।
5. ब्राह्मतम रुधिर बैंकों में रक्त को 4 डिग्री सेंटीग्रेड ताप पर रखा जाता है।
6. रक्तदान सदैव शिराओं में दिया जाता है।
7. रक्तदान करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

5. RH कारक :-

RH कारक की खोजकर्ता सर बीनर है। RH कारक को सर्वप्रथम रिसर्च नामक बंदर में देखा गया था। यदि किसी व्यक्ति के समूह में RH कारक पाया जाता है तो व्यक्ति का रक्त समूह RH पॉजिटिव होता है अगर नहीं पाया जाता है तो वह व्यक्ति का रक्त समूह RH नेगेटिव होता है।
भारत में सर्वाधिक लोग RH+ पॉजिटिव 93% पाए जाते हैं व RH- नेगेटिव 7% पाए जाते हैं।
यदि एक RH पॉजिटिव रक्त समूह वाले व्यक्ति का विवाह RH नेगेटिव रक्त समूह वाली महिला से करा दिया जाए तो इसमें प्राप्त सर्वप्रथम संतान जीवित होती है तो दूसरी संतान की गर्भ में ही मृत्यु हो जाती हैं इस घटना को एरिथोप्लास्टिस या अर्थोप्लास्टिस या फिटलिस कहा जाता है।
ऐसे बच्चों को बचाने के लिए समय पर एंटी RH कारक दिया जाता है।
यदि RH पॉजिटिव व्यक्ति का रक्त RH नेगेटिव रक्त समूह वाले व्यक्ति को दे दिया जाए तो ऐसा करके जीवन में सिर्फ एक ही रोगी की जान बचाई जा सकती है दोबारा ऐसा करने पर रक्त ग्राही की मृत्यु हो जाती है।
RH कारक एक प्रोटीन के कारण होता है उस प्रोटीन का नाम उग्लोबलिटीनोजल है।
रक्तदान दिवस 14 जून को मनाया जाता है क्योंकि इस दिन सर कार्ललैंड स्टीनर का जन्म दिवस है।

हाई ब्लड प्रेशर से आपको हो सकते हैं ये रोग

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व्यस्क लोगों में होने वाली बीमारी अब छोटे बच्चों में देखने को मिल रही है। हाई ब्लड प्रेशर के बढ़ने पर मरीज के रक्त का प्रवाह तेज होने के कारण हृदय पर अधिक दबाव पड़ने लगता है।

हाई ब्लड प्रेशर कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोग तीनों एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। यहां पर हम इन तीनों समस्याओं से फायदा देने वाले कुछ पदार्थों के बारे में चर्चा करेंगे। डायबिटीज और मोटापा की समस्या भी इन्हीं रोगों से जुड़ी होती है। इसलिए इस पोस्ट में दिए गए भोज्य पदार्थ जो मोटापे और डायबिटीज में भी फायदा पहुंचाएंगे। लेकिन कुछ ऐसे पदार्थ हैं जिन्हें हम हृदय रोग में खा सकते हैं लेकिन डायबिटीज में बिल्कुल भी नहीं खा सकते हैं।

मोटापा हमें हृदय रोग की ओर ले जाता है क्योंकि इससे कई तरह की बीमारियां होने की संभावना रहती है। इसलिए मोटापे में उपयोग किए जाने वाले भोज्य पदार्थों का अध्ययन हम पहले कर चुके हैं।

हाई ब्लड प्रेशर से आपको हो सकते हैं ये रोग
Heart Attack, Hingh Blood Pressure Treatment

हृदय रोग में बेचैनी होती है, हृदय में दर्द उठता है जो बाएं हाथ व कंधे तक फैल जाता है, जी मचलने लगता, ठंडा पसीना आने लगता, घबराहट पैदा होती है, हाथ पैर ठंडे पड़ जाते हैं और सांसे तेज होने लगती है।

हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल से संबंधित समस्या यदि हो जाए तो इनसे छुटकारा पाने लिए विश्वभर के विशेषज्ञ या चिकित्सक हमें निम्नलिखित भोज्य पदार्थ उपयोग करने की सलाह देते हैं –

सब्जियां 

1. गाजर हमारे खून को साफ करती है और गाजर का कैरोटीनॉयड हमारे दिल को मजबूत बनाता है। गाजर में मौजूद कैरोटीनॉयड हृदय के रोगों को शरीर के पास नहीं आने देता है। गाजर में बीटा कैरोटीन के अलावा अल्फा कैरोटीन भी पाया जाता है। गाजर में मौजूद घुलनशील फाइबर बाइल एसिड के साथ मिलकर शरीर के कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटाते  हैं।

मुख्य बात :- कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि कैरोटीनॉयड जिन पदार्थों में अच्छी मात्रा में पाया जाता है, वे पदार्थ शरीर को अन्य लाभ पहुंचाने के अलावा हृदय की बीमारी का खतरा भी कम करते हैं। जिसका गाजर ही एक ऐसा पदार्थ है।

घरेलू नुस्खा :- घरेलू चिकित्सकों का कहना है कि एक गिलास गाजर का रस दो माह तक पीने पर हृदय रोग दूर हो जाता है।

2. सेम और अन्य फलीदार सब्जियां जिनमें भरपूर घुलनशील फाइबर होते हैं। इनमें आर्यन, मैग्नीशियम, पोटेशियम एवं फोलेट जैसे तत्व भी होते हैं। ये सभी तत्व कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग व ब्लड प्रेशर को घटाने का कार्य करते हैं। इससे हृदय रोग की समस्याओं में कमी आती है। खास तौर पर यह तत्व कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा कम कर देते हैं।

घरेलू नुस्खा :-  काले चने को उबालकर सेंधा नमक मिलाकर खाने से हृदय रोग में फायदा मिलता है।

3. डायटरी फाइबर होने के कारण शकरकंद दिल के लिए बहुत ही अच्छा है। इसमें भरपूर पोटेशियम भी है जो ब्लड प्रेशर को घटाने में सहायक है। इसका पोटेशियम शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन भी कायम रखता है। जिससे हृदय की कार्यप्रणाली भी ठीक रहती है और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहता है। इसमें मौजूद विटामिन डी न केवल हमें स्वस्थ रखता है बल्कि हमारे दिमाग को भी अच्छा रखता है।

घरेलू नुस्खा :-  शकरकंद में मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में होता है जो रक्त और धमनियों के लिए अच्छा होता है। मैग्नीशियम शरीर को दबाव और तनाव से राहत देता है।

4. टमाटर में विटामिन ए और सी होने की वजह से हमारी कोशिकाओं के दुश्मन फ्री रेडिकल्स (ऑक्सीडेशन का विरोध) से यह लड़ने की क्षमता रखता है। टमाटर धमनियों को सख्त होने से रोकता है जिससे धमनियों में होने वाले रोग कम होते हैं। बड़े चिकित्सकों ने पोटेशियम, फोलेट, नियासिन और विटामिन बी-6 हृदय रोग के मामले में बहुत ही अच्छा बताया है। ये चारों टमाटर में ही पाए जाते हैं।

मुख्य बात :- टमाटर के लाल रंग के लिए लाइकोपेन नाम का तत्व जिम्मेदार होता है। वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में बताया कि हार्ट अटैक झेल चुके व्यक्तियों में लोइकोपेन का स्तर स्वस्थ व्यक्तियों के मुकाबले काफी कम होता है। अनेक अध्ययनों के अनुसार, कैरोटीनॉयड्स के बीच लाइकोपेन हृदय की रक्षा करने में अधिक सक्षम होता है।

5. पालक, कद्दू, फूलगोभी, लौकी, शिमला मिर्च, चकुंदर, लहसुन, प्याज और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां का सेवन करने से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में काफी फायदा मिलता है।
इनमें विटामिन ए, सी व ई, कार्बोहाईड्रेट, फाइबर, कैल्शियम, एंटी आंक्सीडेंट एक साथ होने पर हमारे शरीर में लाभदायक काम करने की चीज है।

अनाज

1. हृदय रोगों में गेहूं की घास कर रस बहुत ही लाभदायक होता है। इसके रस के लिए आप आठ-दस गमले लीजिए और उनमें एक-एक मुट्ठी अनाज के दाने पानी में डाल दे फिर उनको अंकुरित होने पर उसी गमले में बो दे। गमलों को छाया में ही रखें। अब बोये गए अनाज के दानों को आठ-दस इंच तक उगने दे। फिर उनको उखाड़ ले और रगड़ कर या मसल कर उनका रस निकालें। रोजाना खाली पेट आधा गिलास रस पीयें। ऐसा करने से आपको कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और ब्लड प्रेशर में फायदा मिलेगा।

2. भूरे चावल हमारे हृदय के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं। इनमें प्रोटीन, कैल्शियम, थियामाइन, सेलेनियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर पाए जाते हैं। भूरे चावल में मौजूद सेलेनियम तत्व कोलेस्ट्रॉल और दिल की समस्या दूर करता है। विशेषज्ञ फलों के साथ इनको खाने की सलाह देते हैं ताकि एंटी ऑक्सीडेंट गुणों का हमारे शरीर को संपूर्ण फायदा मिल सके।

3. गेहूं का अंकुर भी इन रोगों को दूर करने में सहायक होता है इसलिए इसे पोषक तत्वों का गोदाम कहते हैं। इसमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है और वसा ना के बराबर होती है। इसमें फोलिक एसिड, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन व मिनरल की भरमार होती है। फोलिक एसिड हमारे दिल की बीमारी को दूर करने में लाभकारी होता है। गेहूं के अंकुर में एक खास प्रकार का एरगोथियोनिआइन एंटी ऑक्सीडेंट होता है जो पकने पर भी नष्ट नहीं होता है। यह हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

फल

संतरा, केला, सेब, बेरी, खरबूजा, अंगूर, नींबू एवं नाशपाती आदि फल हमारे शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। इन फलों में एंटी ऑक्सीडेंट, कैल्शियम, फ्लेवोनॉयड, फाइटोकेमिकल्स, विटामिन ए व सी, फोलेट और पोटेशियम आदि तत्व पाए जाते हैं जो कोलेस्ट्रॉल हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारियों को रोकने में सक्षम होते हैं।

धन्यवाद

मोटापे से होने वाली बीमारियां, कारण, उपाय और इसे कम कैसे करें – Simple Health Meter

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मोटापे से होने वाली बीमारियां, कम कैसे करें, कारण, और उपाय तो आइयें जानतें है. 

दोस्तों आज हम बात करेंगे एक ऐसी बीमारी के बारे में जिसकी चपेट में दुनियाभर के लोग हैं। अगर हम विश्वभर की बात करें तो यहां दुनिया में करीब 2 अरब 12 करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में है। अगर भारत की बात करें तो भारत इस बीमारी में तीसरे नंबर पर आ चुका है।
भारत में करीब 5 प्रतिशत लोग इस बीमारी की चपेट में है। जी हां दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं मोटापे को लेकर।
विश्व भर में एक तिहाई लोग मोटापे का शिकार है। मोटापा दुनिया में एक गंभीर समस्या बनकर उभर रहा है ना सिर्फ देश को मैं बल्कि बच्चों में भी मोटापा देखने को मिल रहा है। WHO के अनुसार विश्वभर में 42 मिलियन 5 साल के बच्चे मोटापे का शिकार है।

मोटापे से होने वाली बीमारियां, कारण, उपाय और इसे कम कैसे करें - Simple Health Meter
What is obesity and treatment 

दुनियाभर में हर वर्ष 22 लाख लोग मोटापे की वजह से अपनी जान गंवा देते हैं। एक रिसर्च के अनुसार भारत में साल 2025 तक मोटापे से पीड़ित बच्चों की संख्या 17 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
भारत मोटे बच्चों के मामले में दुनिया के 184 देशों की सूची में दूसरे नंबर पर आ जाएगा जो काफी चौका देने वाला है। दिन प्रतिदिन मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही लेकिन चिकित्सा की बढ़ती उपलब्धियों ने मोटापे से आराम दिलाने के लिए तरीका ढूंढ लिया है।
मोटापे को आधुनिक युग का कैंसर माना जाता है। कई बार स्थिति गंभीर हो जाती है तो डाइटिंग एक्सरसाइज जैसे उपाय भी वजन कम करने में नाकाम रहते हैं। ऐसे में लोगों को बेरियाट्रिक सर्जरी का सहारा लेना पड़ता है।

मोटापा आखिरकार बढ़ता क्यों है,क्या हमारी जीवनशैली की वजह से मोटापा बढ़ रहा है या कुछ और कारण है तथा इससे कौन-कौनसी बिमारी होती हैं आइए जानते हैं –

मोटापा बढ़ने का कारण :-

1. आजकल लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं होते और खासकर बच्चे जो खेलने कूदने की बजाय कंप्यूटर, मोबाइल, वीडियो गेम खेलना पसंद करते हैं जिससे बच्चों में भी मोटापा बढ़ जाता है। व्यस्क लोग भी निष्क्रिय जीवनशैली जी रहे हैं जिससे मोटापे जैसी समस्या पैदा हो रही है।
2. आजकल लोग स्वादिष्ट भोजन और पौष्टिक आहार खाने की बजाय बाहर का खाना पसंद करते तो मोटापे का प्रमुख कारण है।
3. लोग अपनी भागदौड़ के जिंदगी में इतना समय नहीं बचा पाते कि व्यायाम करें जिससे मोटापा बढ़ता रहता है।
4. कुछ लोग डाइटिंग जैसी आदत अपनाते और डाइटिंग ठीक तरीके से नहीं करने पर मोटापा कम होने की बजाय बढ़ जाता है।
5. कुछ लोग बार-बार खाना खाते रहते हैं चाहेे कुछ समय पहले क्यों ना खाना खाया हो ऐसे में मोटापा बढ़ेगा।
6. अनुवांशिकता के कारण भी मोटापा माता-पिता व परिवार के सदस्य में हो तो बच्चे को भी मोटापे की शिकायत रहती है।
7. कई बार लोगों को ज्यादा तनाव, डिप्रेशन और अवसाद से मोटापा बढ़ जाता है।
8. किसी बीमारी के लंबे समय से चलते रहने के कारण दवाइयों के अधिक सेवन से मोटापा बढ़ जाता है मोटापे के कारण कई हो सकते हैं जैसे- खाना खाने के बाद ना टहलना, अधिक सोना, लेटे हुए खाना, खाने की बीच पानी पीना।

मोटापा दूर करने के घरेलू उपचार :-

1. शारीरिक व्यायाम करना मोटापे को कम करने का सबसे सटीक तरीका है। इससे हमारा शरीर भी स्वस्थ रहता है। उचित आहार खाने के बाद सप्ताह में चार-पांच दिन 20:30 मिनट तक व्यायाम करें। यह मोटापा कम करने में सहायक होता है।
2. दिन की शुरुआत करते समय एक चम्मच शहद ले और इसे एक गिलास थोड़ी गर्म पानी में मिलाएं। इस मिश्रण में एक चम्मच नींबू का रस मिलाएं और सुबह उठने इसके बाद खाली पेट इसको पियें। ऐसा दो-तीन महीनों तक करने पर मोटापा कम होगा।
3. सुबह के समय गर्म पानी पिए। गर्म पानी पीने से आपके शरीर में संग्रहित वसा दूर होगा। भोजन करने के बाद भी गरम पानी पिए लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि भोजन और पानी के बीच कम से कम 30 मिनट का अंतराल हो। ऐसा करता रहने से आपके शरीर हमेशा फिट रहेगा।
4. सौंफ भूख कम करने के लिए सबसे लोकप्रिय एवं घरेलू उपचार है। एक कप पानी में 7-8 सौंफ के दानों को पानी में कुछ मिनट उबालें। इस पानी से सौंफ के दानों को निकाल दे और इस पानी को प्रतिदिन खाली पेट की से आपके खाने की इच्छा कम होगी।
5. पुदीने की पत्तियां पाचन में सहायक होती है। पुदीना आपने पाचन गुणों के लिए जाना जाता है। पुदीने की पत्तियों के रस की बूंदे गुनगुने पानी में मिलाएं और खाना खाने के बाद इस मिश्रण को पिए। इससे आपका मोटापा कम होगा।
6. हमेशा अपने घर बना ही भोजन खाएं क्योंकि इस भोजन में वसा व तेल की मात्रा कम होती है। अपने भोजन में फल, हरी सब्जियां शांमिल करें जो मोटापे से लड़ने में सहायक होतीे हैं।
7. एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद, दो चम्मच नींबू का रस एवं एक चुटकी काली मिर्च मिलाएं तथा इनको अच्छे से मिलाएं और इसे प्रतिदिन सुबह पिए इससे आपका वजन कभी ज्यादा नहीं बढ़ेगा।
8. प्रतिदिन सुबह खाली पेट 10 से 12 मीठी नीम (कड़ी पत्ता) की पत्ती खाएं तथा अच्छे से चबाएं और इसका रस पीले। ऐसा तीन-चार महीनों तक लगातार करने से आपका वजन प्रभावी रूप से कम होगा।
9. सलाद के जरिए वजन कम करने के कई तरीके होते हैं – पहली बात तो यह है कि जंक या फास्ट फूड, रेस्तरां में मिलने वाले सलाद पर भरोसा न करें इस सलाद में कैलोरीज ज्यादा होती है जिससे वजन कम होने की बजाय ज्यादा बढ़ेगा। इसलिए आप प्याज, गाजर, मूली, टमाटर, अदरक, हरी गोभी, खीरा, नींबू चने और अंकुरित अनाज आदि का सलाद के रूप में प्रयोग करें।

मोटापे से होने वाली बीमारियां :-

1. मोटापा बढ़ने से डायबिटीज, हाइपरटेंशन और कोलेस्ट्रॉल बढ़ना जैसी बीमारियां हो सकती है।
2. मोटापा से आपका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है जिससे आप अच्छा भी महसूस नहीं कर पाते हैं।
3. मोटापे की वजह से महिलाओं में कैंसर ज्यादा होने की संभावना होंगी।
4. मोटापा बढ़ने से आपको दिल का दौरा पड़ना, धड़कन रूकना जैसी बीमारियां होने की संभावना होती है।
5. मोटापा बढ़ जाने से शरीर पर पसीना अधिक आना, श्वास संबंधित परेशानी हो सकती है।
6. महिलाएं मोटी होने के कारण बच्चे नहीं होने का खतरा रहता है और गर्भधारण बड़ी मुश्किल से होता है।
7. मोटापे से आपको हाई ब्लड प्रेशर, मसल्स में खिंचाव, जोड़ों में दर्द व शुगर जैसी बीमारियां हो सकती है।

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चाणक्य नीति:- हर इंसान में ये मुख्य बातें होनी चाहिए, तभी आप सफल होंगे

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व्यक्ति को जीवन में हमेशा धोखेबाज मित्र, दुष्ट नारी, मूर्ख व्यक्ति, और बड़े राज परिवारों के सदस्यों के साथ सावधानी से पेश आना चाहिए नहीं तो वे आपकी मौत का कारण बन सकते हैं।

धर्म का उपदेश देने वाले, शुभ-अशुभ, कार्य-अकार्य को बताने वाले इस नीति शास्त्र को पढ़कर जो सही रूप से इसे जानता है वही श्रेष्ठ मनुष्य होता है।
इस नीति शास्त्र में हमें क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, क्या अच्छा है, क्या बुरा है इत्यादि के ज्ञान का वर्णन मिलेगा। इसका ज्ञान प्राप्त करने और जीवन में उतारने वाला व्यक्ति ही श्रेष्ठ होता है।

चाणक्य नीति:- हर इंसान में ये मुख्य बातें होनी चाहिए, तभी आप सफल होंगे
चाणक्य नीति क्या है और जीवन में क्या शिक्षा देती है।

विपत्ति आने पर क्या करें :-

विपत्ति का समय आने पर मनुष्य को धन की रक्षा करनी चाहिए और धन से अधिक रक्षा स्वयं की पत्नी की करनी चाहिए। किन्तु अपनी रक्षा का प्रश्न समाने आने पर धन और पत्नी का बलिदान भी करना पड़े तो भी नहीं चूकना चाहिए। संकट, दु:ख में धन ही मनुष्य के काम आता है। अत : ऐसे संकट के समय में बचाया धन ही काम आता है, इसलिए मनुष्य को अपने धन की रक्षा जरुर करनी चाहिए।
चाणक्य धन के महत्त्व को कभी कम नहीं मानते थे क्योंकि धन से व्यक्ति द्वारा अनेक कार्य पूरे किए जाते हैं परन्तु परिवार की भद्र महिला, स्त्री के जीवन-सम्मान का प्रश्न समाने आ जाने पर धन की परवाह नहीं करनी चाहिए।
परिवार की मान-मर्यादा से ही व्यक्ति की अपनी मान-मर्यादा होती है। वही चली गई तो जीवन किस काम का और वह धन भी किस काम का है?
बुरा समय आने पर व्यक्ति का सब कुछ नष्ट हो सकता है । धन का कोई भरोसा नहीं कि कब साथ छोड़ जाऐ । इसलिए धनवान व्यक्ति को भी यह नहीं समझना चाहिए कि उस पर कभी विपत्ति ही नहीं आएगी। दु:ख के समय के लिए कुछ धन अवश्य बचाकर रखना चाहिए ।
यहां अभिप्राय यह है कि धन का प्रयोग अनुचित कार्यों में किया जाए तो उसके नष्ट होने पर व्यक्ति विगति को प्राप्त होता है, किन्तु अच्छे कार्यो में व्यय किया गया धन व्यक्ति को मान, प्रतिष्ठा और समाज में आदर का पात्र बनाता हैं।

मौत के कारणों से कैसे बचे :-

यहां पर आचार्य चाणक्य कहते हैं कि चार चीजें किसी भी व्यक्ति के लिए जीती जागती मृत्यु के समान है – दुष्ट मित्र, दुश्चरित्र पत्नी, जवाब देने वाला व्यक्ति और मुंहलगा नौकर इन सब का व्यक्ति को त्याग कर देना चाहिए। ऐसा न करने पर व्यक्ति के जीवन को हमेशा खतरा बना रहता है। क्योंकि किसी सद्ग्रस्थ व्यक्ति के लिए उसकी पत्नी का दुष्ट चरित्र होना मृत्यु के समान है। वह स्त्री सदैव व्यक्ति के दुख का कारण बनी रहती है और ऐसा होने पर व्यक्ति आत्महत्या करने पर विवश हो जाता है। इसी प्रकार धूर्त व्यक्ति या दुष्ट मित्र आपका कभी भी हितकारी नहीं हो सकता।
घर का नौकर या सेवक आपके घर के सारे भेद जानता हो और वह अपने मालिक की आज्ञा का पालन नहीं करता हो, तो वह आपकी मुसीबत का कारण बन सकता है। इसलिए मनुष्य को इन लोगों से हर वक्त सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि ऐसे लोग कभी भी धोखा दे सकते हैं जो किसी मृत्यु के समान है।
अत: ऐसे में पत्नी को चरित्रवान व पतिव्रता होना, मित्र को ईमानदार और समझदार होना एवं नौकर को मालिक के प्रति वफादार होना चाहिए अगर इसके विपरीत हो तो व्यक्ति के जीवन में कष्ट ही कष्ट होते हैं।

इन स्थानों पर कभी नहीं रहे :-

जिस देश, समाज व परिवार में व्यक्ति का मान सम्मान न हो, मित्र बंधु न हो, आजीविका ना मिले और जहां विद्या प्राप्त करने को नहीं मिले उस व्यक्ति को ऐसे स्थानों पर नहीं रहना चाहिए।
ऐसे स्थानों पर रहने से व्यक्ति को कोई लाभ नहीं मिलता है,तो व्यक्ति को इन स्थानों को छोड़ देना चाहिए। अतः मनुष्य आजीविका के लिए बेहतर स्थान चुनें जहां समाज, मित्र बंधु अच्छे हो क्योंकि मनुष्य सांसारिक प्राणी है इसलिए वह आजीविका  के भरोसे जीवित नहीं रह सकता।
आचार्य चाणक्य कहते हैं की व्यक्ति को ऐसे देश, समाज और परिवार में नहीं रहना चाहिए जहां उसका मान सम्मान ना हो, भाईचारा ना हो और आजीविका एवं विद्या अध्ययन के साधन प्रयुक्त ना हो बल्कि उसे उस जगह पर निवास करना चाहिए जहां यह सब प्रयुक्त हो।

मनुष्य की परख कब होती है :-

हम सभी जानते हैं कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है वह अकेला नहीं रह सकता। उसे हर काम में एक सहायक, मित्र-बंधु, परिवार व पत्नी की आवश्यकता होती है परंतु किसी कारणवश यह लोग उस व्यक्ति की जीवन यात्रा में सहायक नहीं होते हैं, तो उसका जीवन निष्फल हो जाता है। अतः सही सहायक वही होता है जो मनुष्य के कठिन समय में काम आता है।
जब कोई व्यक्ति कठिन समय में फंस जाता है तब उसे एक सहायक की आवश्यकता होती है ऐसे में परिवारजन, मित्र, पत्नी उसके सहायक होते हैं वही अच्छे मित्र कहलाते हैं।
जब किसी व्यक्ति के प्राण संकट में पड़ जाए तब कोई मित्र, परिवारजन व पत्नी उसे इस संकट से उभारते हैं और उसके प्राण रक्षा में सहायक होते हैं वही सबसे अच्छे मित्र होते हैं। नहीं तो सब स्वार्थ के लिए ही जुड़े होते हैं।

व्यक्ति को देख परख कर ही भरोसा करें :-

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को हिंसक पशुओं, शस्त्र धारियों, बड़े-बड़े लोगों और दुष्ट स्त्रियों पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कब चोट पहुंचा दे कोई पता नहीं होता है। जैसे हम शेर, भालू, चीता या कोई भी जंगली जानवरों पर भरोसा नहीं करते हैं, क्योंकि उनके संबंध से हम परिचित हैं। इस कारण उन पर विश्वास करने वाला व्यक्ति हमेशा धोखा खाता है। इसी प्रकार आप कोई नदी पार करना चाहते हैं तो आपको किसी व्यक्ति पर विश्वास नहीं करना चाहिए की नदी का प्रवाह व गहराई कितनी है क्योंकि इसके संबंध में कोई निश्चित धारणा नहीं बताई जा सकती इसलिए नदी पार करते समय आपको सावधानी बरतनी होगी और स्वयं के विवेक का प्रयोग करना होगा।
इसलिए आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति को समय के अनुसार मित्र, परिवारजनों की, समाज, व पत्नी की परख करनी चाहिए। क्योंकि इनकी चित्त-प्रतियां क्षण प्रतीक्षण बदलती रहती है इसलिए इन पर विश्वास या भरोसा सही समय के अनुसार करना चाहिए। यह नीति कहती है।

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मुंह के छाले :- घरेलू उपचार, कारण व निदान कैसे करें आइयें जानतें हैं – Simple Health Meter

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मुंह के छाले :- घरेलू उपचार, कारण व निदान कैसे करें तो आइयें जानतें है .

मुंह का छाला होठों पर या मुंह के अंदर स्थित उपकला में दरार के कारण मुंह के अंदर दिखाई देने वाला एक घाव का नाम है।
मुंह के छाले अनेक प्रकार के होते हैं – सूक्ष्म जीवों के संक्रमण, कैंसर युक्त, रासायनिक या भौतिक चोट और जलन के द्वारा छाला बना रहता है।
शायद ही कोई व्यक्ति है जिसे यह रोग नहीं हुआ हो और यह छाले जिसके होते उसका दर्द वही जानता है। मुंह में छाले होना एक सामान्य सी बात है जो कुछ दिन बाद स्वत: ही ठीक हो जाते हैं।

मुंह के छाले :- घरेलू उपचार, कारण व निदान कैसे करें आइयें जानतें हैं  - Simple Health Meter
मुंह के छालें 

कुछ लोगों को यह रोग बार-बार होता रहता है जिससे उन्हें काफी परेशानी आती है। अतः उन लोगों को चिकित्सक से पूरी जांच करानी चाहिए, ताकि उनका समय पर सही इलाज किया जा सके।
मुंह के छाले पेट की गर्मी के कारण होते हैं और कई बार लोगों को अंदरूनी बुखार होने की वजह से भी हो जाते हैं। जीवन में व्यक्ति कभी न कभी इसकी चपेट में आ जाता है।

मुंह में छाले होने के कारण :-

1. मुंह के छाले होने की सबसे बड़ी वजह है मुंह की सफाई न करना। जैसे- कुछ लोग सुपारी, गुटखा, तंबाकू एवं जर्दा खाने के बाद बिना मुंह साफ किए ही सो जाते हैं या हमें खाए सो जाते हैं।
2. जरूरत से अधिक ब्रश करना भी मुंह के छालों का कारण बन सकता है।
3. हमारे शरीर में पोषक तत्व संपूर्ण तरीके से नहीं मिलने के कारण मुंह के छाले हो जाते हैं।
4. मुंह में लगने वाली हल्की बारिक चोट से मुंह के छाले होने का मुख्य कारण है।
5. अधिकांश टूथपेस्टो में सोडियम लोरिल सल्फेट अधिक होने की वजह से भी छाले हो जाते हैं।
6. मुंह के अंतर्गत छाले होने का मुख्य कारण बिना हाथ धोए अपने फटे होठों को छू लेने से हाथों के जीवाणु फटे होठों की खुली छोटी दरारों में प्रवेश कर जाते हैं जिसकी वजह से होठों के अंदर भी छाले हो जाते हैं।
7. हमारे शरीर में प्रतिकारक क्षमता में कमी होने की वजह से बार-बार मुंह में छाले होते हैं।
8. किसी प्रकार की मुंह में एलर्जी होने पर भी छाले हो जाते हैं।
9. मुंह में छाले विटामिन B या C की कमी से, इन्फेक्शन, एसिडिटी एवं दांतों की समस्या से हो सकते हैं।
10. कई बार खाना या कोई चीज खाते समय जीभ या गाल का कुछ हिस्सा दातों में आ जाने की वजह से मुंह में छाले बन जाते और यह छालें स्वत: ही ठीक हो जाते हैं।
11. लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाइयों का इस्तेमाल करने से भी छाले हो सकते हैं।
12. कृतिम दांत तीखा या तिरछा लगने के कारण बार-बार हमारी जीभ या गाल से घर्षण करता रहता है जिसकी वजह से मुंह में छाले और कैंसर होने की संभावना रहती है।
13. मुंह में कैंसर होने की वजह से छाले हो सकते हैं क्योंकि घाव का केंद्र रक्त के प्रवाह को खो देता है।
कभी-कभी व्यक्ति को मुंह में लगने वाली चोट से छालें होने का मुख्य कारण है।
14. मुंह में छाले होने के कारण कई प्रकार के है जैसे- कई बार पेट की गर्मी से भी मुंह में छाले होते हैं। कभी-कभी साफ तरीके से शौच नहीं जाने पर भी मुंह में छाले हो जाते हैं।

मुंह के छालों का घरेलू उपचार :-

1. जिन लोगों को छाले बार-बार होते हैं उन्हें टमाटर ज्यादा मात्रा में खाने चाहिए। टमाटर के रस को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
2. चमेली और तुलसी के पत्तों को चबाने से छाले मिट जाते हैं।
3. एक चम्मच शहतूत के शरबत को एक कप पानी में मिलाकर कुल्ला करने से छालों में लाभ मिलता है।
4. अमरूद की नर्म पत्तियों को पानी में उबालकर कुल्ला करने से मुंह के छालों एवं मसूड़ों का दर्द दूर हो जाता है। ऐसा करने से मुंह की दुर्गंध भी दूर होती है।
5. पिसे हुए धनिए को छालों पर डालकर लार टपकाएं। धनिया का बारीक चूर्ण व खाने वाला सोडा मिलाकर छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
6. सूखा धनिया, हरा पुदीना और मिश्री समान भाग में लेकर चबाएं और लार टपकाएं। ऐसा करने से मुंह के छाले कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं।
7. भोजन करने के बाद सौंफ खाने से छाले नहीं होते हैं।
8. मसालेदार या गर्म भोजन नहीं खाने से मुंह के छालों में आराम मिलता है।
9. मुंह के छालों से बचने के लिए मुंह और पेट की सफाई का ध्यान जरूर रखें। अधिक गर्मी के मौसम में छाले होने की संभावना ज्यादा रहती है।
10. अगर किसी व्यक्ति को छाले ज्यादा दिन तक रहे तो उसे किसी डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता है।

धन्यवाद 

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